US Intelligence Alert: मध्य-पूर्व के संघर्षपूर्ण माहौल के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जो अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस बात की पुख्ता जानकारी मिली थी कि इजरायल ईरान के शीर्ष नेताओं, विशेषकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ, की हत्या की साजिश रच रहा है। ये दोनों नेता अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन को आशंका थी कि इजरायल की यह कार्रवाई शांति के प्रयासों को पूरी तरह विफल कर सकती है। इस खतरे को भांपते हुए अमेरिका ने मध्य-पूर्वी देशों के माध्यम से ईरान को गुप्त रूप से चेतावनी भेजी थी और इजरायल पर भी दबाव डाला था कि वह इन नेताओं को अपनी ‘हिट लिस्ट’ से हटाए।

वार्ता और शांति के बीच का संघर्ष
युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी अधिकारियों का भी मानना था कि ईरान के इन नेताओं को निशाना बनाना इजरायल की रणनीतिक आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, अप्रैल में जब दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू हुई, तो वाशिंगटन ने अपनी प्राथमिकताएं बदल दीं। अमेरिका का स्पष्ट मानना था कि अराघची या गालिबफ पर कोई भी हमला महीनों की मेहनत से तैयार हुई सीजफायर डील को मलबे में तब्दील कर देगा। अमेरिकी दबाव के कारण ही मार्च में इजरायल को इन नेताओं को अपने निशाने से हटाना पड़ा था। गौरतलब है कि इससे पहले इजरायली हवाई हमलों में ईरान के अन्य उदारवादी नेता अली लारीजानी और कमाल खराजी मारे जा चुके थे, जिससे शांति वार्ता की संभावनाएं पहले ही काफी कमजोर हो गई थीं।

गालिबफ की जान पर बन आई: मौत को मात देकर लौटे वापस
संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के लिए यह युद्ध बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे दो बार इजरायली बमबारी के मलबे में दबने के बावजूद चमत्कारिक रूप से जीवित बाहर निकले हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा इतना बढ़ा हुआ है कि हाल ही में जब वे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत के बाद तेहरान लौट रहे थे, तब इजरायली लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को घेरने की कोशिश की थी। ईरानी खुफिया इनपुट्स के बाद गालिबफ के विमान की मशहद में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी और अंततः उन्हें सड़क मार्ग से सुरक्षित तेहरान पहुंचाया गया।
अमेरिका बनाम इजरायल: अलग होती रणनीतिक राहें
इस घटना ने अमेरिका और इजरायल के बीच की बढ़ती दूरी को उजागर किया है। अमेरिका, जहां जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में ईरान के साथ शांति फ्रेमवर्क (होर्मुज जलडमरू मध्य और परमाणु कार्यक्रम पर) को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं इजरायल इसे अपने लिए बड़ी आपदा मान रहा है। इजरायल का दृढ़ मत है कि इस समझौते से ईरान को आर्थिक मजबूती मिलेगी, जो उसके अस्तित्व के लिए खतरा है। इजरायल सत्ता परिवर्तन और ईरान के सैन्य तंत्र को पूरी तरह नष्ट करने पर आमादा है। इन जानलेवा खतरों के बावजूद, अराघची और गालिबफ शांति प्रयासों में लगे हैं, और व्हाइट हाउस इस वार्ता को हर हाल में अंजाम तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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