Parliament Monsoon Session 2026: संसद का आगामी मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक आयोजित होने की संभावना है। चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकों का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस सत्र का महत्व इसलिए और अधिक बढ़ गया है क्योंकि लोकसभा के सिटिंग प्लान में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। टीएमसी, शिवसेना (यूबीटी) और डीएमके में हुई टूट तथा बगावत का सीधा असर सदन की व्यवस्था पर दिखेगा। लोकसभा अध्यक्ष इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर फैसला ले सकते हैं, जिसमें टीएमसी के 20 बागी सांसदों का एनसीपीआई में विलय और शिवसेना (शिंदे गुट) में यूबीटी के छह सांसदों के विलय जैसे विवादास्पद मामले शामिल हैं। इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच एनडीए सरकार सदन में अपनी संख्या बल का लाभ उठाते हुए कई बड़े विधायी एजेंडों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

संविधान संशोधन और सरकार के प्रमुख विधायी लक्ष्य
एनडीए सरकार इस सत्र के दौरान दो अत्यंत महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है। सरकार का मुख्य ध्यान ‘महिला आरक्षण और परिसीमन’ से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर है। इस बार इसमें एक अहम बदलाव करते हुए लोकसभा और विधानसभा सीटों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही, 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी चर्चा का विषय रहेगा, जिसके तहत 30 दिन से अधिक की जेल होने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री की कुर्सी छिन सकती है। जेपीसी (JPC) ने इस विधेयक में कुछ संशोधन और स्पष्टता के सुझाव दिए हैं, ताकि कानून का दुरुपयोग न हो। इसके अलावा, सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे बड़े बिलों को भी पारित कराने की दिशा में सक्रिय कदम उठा सकती है।

इन महत्वपूर्ण बिलों पर भी केंद्रित रहेगा सरकार का ध्यान
विधायी कार्यों की लंबी सूची के साथ, सरकार कई अन्य अहम विधेयकों को भी सदन के पटल पर रखेगी। इनमें एफसीआरए (FCRA) संशोधन बिल, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल और एंटी-डोपिंग बिल प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से संबंधित अध्यादेश के स्थान पर नया विधेयक लाया जाएगा। साथ ही, कॉर्पोरेट लॉ, सिक्योरिटीज मार्केट कोड और कोड ऑन वेजेस सेंट्रल रूल्स जैसे विषयों पर भी चर्चा और विधायी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। सरकार के लिए इन महत्वपूर्ण बिलों को बिना किसी बड़े अवरोध के पारित कराना एक बड़ी प्राथमिकता होगी, विशेषकर तब जब विपक्षी खेमे में बिखराव की स्थिति बनी हुई है।
विपक्षी दलों का आक्रामक रुख और संभावित हंगामेदार सत्र
विपक्ष ने भी सरकार को घेरने के लिए एक मजबूत रणनीति तैयार की है। विपक्षी दल देश में मॉनसून की अनिश्चितता के कारण पैदा हुए सूखे और बाढ़ के हालात पर चर्चा की मांग करेंगे। इसके साथ ही, नीट पेपर लीक विवाद, राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार पर तीखे हमले होने की उम्मीद है। क्षेत्रीय दलों में टूट के पीछे सरकार की कथित भूमिका पर भी विपक्ष आक्रामक रुख अपना सकता है। हालांकि, पश्चिम बंगाल और असम में हालिया चुनावी जीत के बाद भाजपा का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है, और वह ‘इंडिया’ ब्लॉक की टूट को आधार बनाकर विपक्ष को सदन के भीतर और बाहर चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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