Ram Mandir Row : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच का मुख्य केंद्र जेल में बंद मुख्य आरोपियों की संपत्ति और उनके वित्तीय स्रोतों पर है। पुलिस टीम न केवल आरोपियों के बैंक खातों की गहन जांच कर रही है, बल्कि उनके परिजनों और संबंधियों के नाम पर खरीदी गई जमीन के दस्तावेजों को भी खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मंदिर में कार्यरत रहने के दौरान आरोपियों की आय और संपत्ति में किस प्रकार का अस्वाभाविक इजाफा हुआ है।

आरोपियों की सूची और सुरक्षा खामियों पर मंथन
जांच के घेरे में अनुकल्प, लवकुश, अविनाश, टिन्नू यादव और रमाशंकर करुणेश जैसे नाम प्रमुखता से सामने आए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर मंदिर के चढ़ावे से लाखों की संपत्ति अर्जित की है। जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी के अनुसार, इस मामले में करीब 40 लोगों की एक सूची तैयार की गई है, जिनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस सूची में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस मंदिर की काउंटिंग प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था में उन खामियों को भी चिन्हित कर रही है, जिनका लाभ उठाकर एक लंबे अरसे तक चोरी का यह सिलसिला चलता रहा।

एसआईटी की रिपोर्ट और आगामी कार्रवाई
पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) दो दिनों तक अयोध्या में डेरा डालने के बाद शुक्रवार रात लखनऊ लौटी थी। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को पुनः अयोध्या आ सकती है। सरकार द्वारा एसआईटी को 15 जुलाई तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह रिपोर्ट पूरे मामले में दोषियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करने में निर्णायक साबित होगी।
6 जुलाई को ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आगामी 6 जुलाई को मणि रामदास छावनी में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक का एजेंडा काफी व्यापक है, जिसमें एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर भी मंथन होगा। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि द्वारा जारी एजेंडे में वित्तीय विवरणों, गैर-लेखापरीक्षित आय-व्यय और बैलेंस शीट की स्वीकृति भी शामिल है।
प्रबंधन में बदलाव और प्रशासनिक सुधार की तैयारी
ट्रस्ट की इस बैठक में मंदिर के सुचारू प्रबंधन के लिए एक सीईओ (CEO) की नियुक्ति पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। साथ ही, मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र द्वारा प्रस्तावित ‘तीन-स्तरीय प्रबंधन व्यवस्था’ पर भी मंथन किया जाएगा। इस बदलाव के तहत तिरुपति बालाजी, काशी विश्वनाथ और वैष्णव देवी जैसे प्रमुख मंदिरों की प्रशासनिक मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। राम मंदिर की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए इन मंदिरों की तर्ज पर बड़े प्रशासनिक सुधार किए जाने की उम्मीद है।
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