India-Australia Nuclear Deal: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता साफ होते ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए इस उपलब्धि का श्रेय पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि पीएम मोदी भले ही इस समझौते को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहे हों, लेकिन इसकी असली नींव डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने रखी थी। उन्होंने दावा किया कि यह ऐतिहासिक फैसला केवल यूपीए की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है।

मनमोहन सिंह और 2008 का परमाणु समझौता: नींव और मेहनत
जयराम रमेश ने तर्क दिया कि ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम मिलने का मार्ग 8 अक्टूबर 2008 को हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद प्रशस्त हुआ था। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की मुलाकात ने ही इस परमाणु सहयोग की शुरुआत की थी। कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब यह समझौता हो रहा था, तब बीजेपी ने संसद के भीतर और बाहर इसका पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा देश में बड़े बदलाव (टर्निंग पॉइंट) लाती है, जबकि बीजेपी का काम केवल उन फैसलों पर ‘यू-टर्न’ लेना और उनका श्रेय लेना है।

लंबे समय से अटकी थी सप्लाई: अब कैसे शुरू होगा आयात?
दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर तो 2014 में ही हो गए थे, लेकिन यूरेनियम की आपूर्ति पिछले एक दशक से तकनीकी और रिपोर्टिंग से जुड़े मुद्दों के कारण रुकी हुई थी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में दोनों देशों ने गहन कूटनीतिक बातचीत की है। इन बैठकों का उद्देश्य अकाउंटिंग और रिपोर्टिंग से जुड़ी उन चिंताओं को दूर करना था जो आपूर्ति में बाधक बनी हुई थीं। अब एक मजबूत G-to-G (सरकार से सरकार) ढांचा तैयार हो गया है, जिसके तहत सरकारी और निजी कंपनियां व्यावसायिक अनुबंध कर यूरेनियम का आयात शुरू कर सकेंगी।
पीएम मोदी और अल्बनीज की बैठक: स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगी नई उड़ान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की हालिया मुलाकात इस समझौते में निर्णायक साबित हुई। संयुक्त बयान के अनुसार, भारत को मिलने वाला यह यूरेनियम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की कड़ी निगरानी में होगी। पीएम मोदी ने कहा कि इस समझौते से भारत के ‘क्लीन एनर्जी’ लक्ष्यों को प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके साथ ही, ऑस्ट्रेलिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन दोहराया है। यह समझौता न केवल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है, बल्कि दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करता है।
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