Manish Kashyap Controversy: टोयोटा ने दर्ज कराई FIR, नितिन गडकरी बोले- E20 नहीं, पानी था वजह

Manish Kashyap Controversy:  बिहार के चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप एक बार फिर कानूनी संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। हाल ही में एक पेट्रोल पंप पर इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E-20 पेट्रोल) को लेकर किए गए हंगामे के बाद अब मामला पुलिस तक पहुंच गया है। कश्यप ने आरोप लगाया था कि इथेनॉल युक्त पेट्रोल के कारण उनकी टोयोटा कार खराब हो गई। इस दावे के बाद टोयोटा कंपनी ने उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है। इस घटनाक्रम के बाद अब राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पुलिस उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावों को बताया पूरी तरह गलत

इस पूरे विवाद पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्री ने बिना नाम लिए मनीष कश्यप के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें झूठा करार दिया है। गडकरी के अनुसार, जब गाड़ी में खराबी का मामला सामने आया, तो टोयोटा कंपनी ने जांच के लिए वाहन की मांग की थी, लेकिन शुरुआत में कश्यप ने गाड़ी नहीं भेजी। बाद में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बाद ही गाड़ी निरीक्षण के लिए सौंपी गई।

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जांच में सामने आई सचाई, कंपनी ने दर्ज कराया मुकदमा

नितिन गडकरी ने आगे बताया कि टोयोटा के विशेषज्ञों द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि गाड़ी की खराबी का इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E-20) से कोई लेना-देना नहीं है। विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि वाहन में आई तकनीकी समस्या पूरी तरह से अलग थी। चूंकि मनीष कश्यप ने सार्वजनिक मंचों पर ई-20 पेट्रोल और सरकारी नीतियों को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई और झूठे आरोप लगाए, इसलिए कंपनी ने उनके विरुद्ध कानूनी कदम उठाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह सरकार की उन नीतियों के लिए एक बड़ा झटका है, जिनका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना है।

विवादों से पुराना नाता: फिर दोहराया जा सकता है पिछला इतिहास

मनीष कश्यप के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वर्ष 2023 में वे कानून की जद में आ चुके हैं। तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों के बारे में कथित रूप से फर्जी वीडियो साझा करने के आरोप में 18 मार्च 2023 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद काफी समय तक वे जेल में रहे थे। अब पेट्रोल पंप विवाद के बाद एक बार फिर उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

सरकार की इथेनॉल नीति और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी

यह पूरा प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए इथेनॉल सम्मिश्रण (Ethanol Blending) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। जानकार मानते हैं कि इस तरह के बिना आधार वाले दावे न केवल सरकारी नीतियों को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम जनता में भी भ्रम पैदा करते हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है और मनीष कश्यप का अगला बचाव क्या होता है। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Chandan Das

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