Pakistan Under Fire: नाबालिग लड़कियों की शादी और धर्मांतरण ,यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान को लगाई फटकार

पाकिस्तान एक बार फिर मानवाधिकार के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रहा है। यूरोपीय संसद ने नाबालिग लड़कियों के कथित जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह के मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संसद ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों की बेटियां पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं हैं। आखिर प्रस्ताव में क्या कहा गया और पाकिस्तान से कौन-कौन से कदम उठाने की मांग की गई? जानिए पूरी रिपोर्ट।

Pakistan Under Fire:  पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। हाल ही में यूरोपीय संसद ने इस विषय पर एक कड़ा प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। संसद ने साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान में मानवाधिकारों का हनन और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार जारी हैं, जो कि किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है।

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13 वर्षीय मारिया शहबाज का मामला बना चर्चा का केंद्र

यूरोपीय संसद ने अपने आधिकारिक बयान में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शहबाज के मामले को प्रमुखता से उठाया है। मारिया को मार्च 2026 में अगवा कर लिया गया था, जिसके बाद उसका जबरन इस्लाम में धर्मांतरण कराकर उसके अपहरणकर्ता से निकाह करा दिया गया। इस प्रस्ताव में मारिया के मामले को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे व्यापक शोषण का एक जीता-जागता प्रतीक बताया गया है। यूरोपीय संसद के सदस्यों ने मांग की है कि मारिया को तुरंत उचित कानूनी सहायता, पारिवारिक समर्थन और मनोवैज्ञानिक परामर्श मुहैया कराया जाए।

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संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े और बढ़ता हुआ अपराध ग्राफ

प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 में जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन के शिकार होने वाली लड़कियों में लगभग 75% हिंदू और 25% ईसाई समुदाय की हैं। यूरोपीय संसद ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया है कि किस तरह से विवाह को ढाल बनाकर नाबालिग लड़कियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। यूरोपीय सांसदों का कहना है कि यह केवल एक लड़की का मामला नहीं है, बल्कि यह एक खतरनाक पैटर्न है जो पाकिस्तान के ईसाई और हिंदू समुदायों को भयभीत करने के लिए उपयोग किया जा रहा है।

पाकिस्तानी सरकार के सामने रखीं कड़़ी शर्तें और मांगें

यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह बाल विवाह को रोकने के लिए अपने मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करे, जो पहले से ही देश के कुछ प्रांतों में बने हुए हैं। संसद ने एक विशेष ‘राष्ट्रीय तंत्र’ बनाने का आग्रह किया है, जिसका मुख्य कार्य अपहृत या जबरन धर्मांतरित की गई अल्पसंख्यक लड़कियों के परिवारों की शिकायतों का त्वरित निपटारा करना हो। यह कदम पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अनिवार्य बताया गया है।

कानूनी फैसलों पर उठे सवाल, न्याय व्यवस्था पर संकट

इस मामले में ‘ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान’ (HRFP) ने भी अपनी गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, 13 वर्षीय मारिया को 29 जुलाई 2025 को अगवा किया गया था। तमाम आधिकारिक दस्तावेजों में उसके नाबालिग होने की पुष्टि होने के बावजूद, अदालती फैसलों ने इस जबरन विवाह को कानूनी वैधता प्रदान कर दी। यहाँ तक कि कोर्ट ने आरोपी को लड़की की कस्टडी भी सौंप दी। इस प्रकार की न्यायिक कार्रवाई ने पाकिस्तान की न्याय प्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं, जहां कानून का उपयोग पीड़ितों के बजाय अपराधियों को संरक्षण देने के लिए किया जा रहा है।

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Chandan Das

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