CG Teacher Suspended: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में शिक्षा विभाग की गरिमा को तार-तार करने वाला एक मामला सामने आया है। रामानुजनगर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले साल्ही गांव की शासकीय प्राथमिक शाला खोरखोरीपारा के हेडमास्टर हरिनंदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि वे विद्यालयीन समय में शराब के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचे थे। इस घटना ने न केवल विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य के प्रति एक शिक्षक की जिम्मेदारी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हेडमास्टर का अभद्र वीडियो
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में प्रधान पाठक हरिनंदन सिंह न केवल नशे की हालत में नजर आ रहे हैं, बल्कि स्कूल परिसर में जमीन पर लेटे हुए और ग्रामीणों, छात्रों व अन्य शिक्षकों के साथ गाली-गलौज करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। उनका यह व्यवहार न केवल शिक्षा के मंदिर की मर्यादा के विरुद्ध है, बल्कि छोटे बच्चों के मानसिक पटल पर भी नकारात्मक प्रभाव डालने वाला है। वीडियो सामने आते ही जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और त्वरित जांच के आदेश दिए।

जांच रिपोर्ट में पुष्टि, शिक्षा विभाग ने लिया कड़ा संज्ञान
कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी, रामानुजनगर ने पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया प्रधान पाठक पर लगे सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 का गंभीर उल्लंघन मानते हुए हरिनंदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एक शिक्षक का ऐसा आचरण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और यह शैक्षणिक वातावरण को पूरी तरह दूषित करता है।
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निलंबन के साथ विभागीय जांच भी शुरू, मुख्यालय प्रतापपुर तय
शिक्षा विभाग ने केवल निलंबन तक ही सीमित न रहकर, हरिनंदन सिंह के विरुद्ध नियम-14 के तहत विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, प्रतापपुर निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा। विभाग ने इस मामले को लेकर पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया है और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कड़ी दंडात्मक कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
प्रशासन की सख्त चेतावनी: शिक्षा के मंदिर में अनुशासन सर्वोपरि
जिला शिक्षा अधिकारी ने इस आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर, लोक शिक्षण संचालक, संयुक्त संचालक सरगुजा संभाग और संबंधित जिला कोषालय अधिकारियों को भेज दी है। यह कार्रवाई अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि पद की गरिमा और आचरण के नियमों का उल्लंघन करने पर विभाग कोई रियायत नहीं बरतेगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को संस्कार और शिक्षा देने के स्थान पर इस तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, इस निलंबन आदेश के बाद पूरे जिले के शैक्षणिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
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