US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, बाइडन प्रशासन ने ईरान के खिलाफ एक और सख्त कदम उठाते हुए 14 प्रमुख लोगों और संस्थाओं पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी सरकार का स्पष्ट मानना है कि इन व्यक्तियों और कंपनियों का उपयोग ईरान के शीर्ष नेतृत्व तक धन पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नियमों को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इन प्रतिबंधों का मुख्य केंद्र दुबई में स्थित ईरानी बैंकर और व्यवसायी अली अंसारी हैं। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि अंसारी ने ईरान के प्रभावशाली नेताओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल विदेशों में रियल एस्टेट और व्यावसायिक संपत्तियों में निवेश करने के लिए किया।

शेल कंपनियों के जाल का पर्दाफाश
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की विदेशी संपत्ति नियंत्रण इकाई (OFAC) ने खुलासा किया है कि अली अंसारी और उनके सहयोगियों ने अरबों डॉलर के संदिग्ध लेनदेन को अंजाम देने के लिए विभिन्न देशों में शेल कंपनियों और जटिल बैंक खातों का जाल बिछा रखा था। प्रतिबंधों की सूची में ईरान की तीन प्रमुख एक्सचेंज कंपनियां और कुछ विदेशी फ्रंट कंपनियां भी शामिल हैं। इन पर यह गंभीर आरोप है कि ये कंपनियां प्रतिबंधित ईरानी बैंकों की ओर से हर साल अरबों डॉलर का हेरफेर करती थीं और असली लेन-देन को छिपाने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लेती थीं। अमेरिका का दावा है कि यह पूरा तंत्र ईरान को विदेशी मुद्रा जुटाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था का दुरुपयोग करने में मदद करता था।

तेल टैंकरों पर हमले और बढ़ती सैन्य सख्ती
ये नए प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए गए हैं जब हॉर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा को लेकर हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। पिछले सप्ताह ईरान द्वारा कतर और सऊदी अरब के तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद तनाव और अधिक बढ़ गया है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की, जिसके पलटवार में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। हालांकि, वर्तमान में स्थिति अस्थायी रूप से शांत प्रतीत हो रही है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव की रेखाएं स्पष्ट रूप से खिंची हुई हैं, जिससे क्षेत्र में किसी भी समय बड़े संघर्ष की आशंका बनी हुई है।
अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व का रुख
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ईरान के शासक वर्ग की आर्थिक शक्ति को पंगु बनाने के लिए अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। इसी कड़ी में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि ईरान के नेताओं को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए अमेरिका अपने सभी आर्थिक और कानूनी साधनों का उपयोग करेगा। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ पहले हुआ युद्धविराम अब समाप्त हो गया है, हालांकि ईरान के अनुरोध पर कूटनीतिक बातचीत के द्वार अभी बंद नहीं हुए हैं। ईरान ने भी अपना कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी अमेरिकी दबाव या समझौते के उल्लंघन का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।
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