Datia News: समर्थकों के उपद्रव के बाद नरोत्तम मिश्रा का पहला बयान, जानिए क्या बोले

Datia News: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा को टिकट न दिए जाने के निर्णय ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। आलाकमान ने इस बार नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया है। इस घोषणा के साथ ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का धैर्य जवाब दे गया और वे बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का आक्रोश इतना अधिक था कि उन्होंने उग्र रूप धारण कर लिया। समर्थकों ने न केवल जमकर हंगामा किया, बल्कि पुलिस वाहनों को पलटने और उन पर पथराव करने जैसी हिंसक घटनाएं भी अंजाम दीं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

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हाईवे जाम और बीजेपी कार्यालय पर कब्जे से बिगड़े हालात

विरोध-प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से धता बता दिया। नाराज कार्यकर्ताओं ने दतिया में बीजेपी कार्यालय पर अपना कब्जा जमा लिया और जमकर नारेबाजी की। इस हिंसा और विरोध की आग का असर यातायात पर भी पड़ा, जहां प्रदर्शनकारियों ने झांसी-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को जाम कर दिया, जिससे आम यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। दतिया में हुई इस तोड़फोड़ और उपद्रव की खबरें राज्यभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यह घटना बीजेपी के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान और नेतृत्व के प्रति नाराजगी को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे पार्टी की छवि पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

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नरोत्तम मिश्रा का सामने आया बयान: कार्यकर्ताओं से शांति की अपील

उपद्रव और हिंसा के मामले में घिरे नरोत्तम मिश्रा ने पहली बार इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे प्रदर्शन के हिंसक दृश्यों को देखकर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की है। नरोत्तम मिश्रा ने अपने बयान में कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की और कहा, “मैंने सोशल मीडिया पर जो विजुअल देखे, जिसमें कार्यकर्ता पेट्रोल और मिट्टी का तेल लेकर उग्र प्रदर्शन कर रहे थे, वह अत्यंत दुखद है। मैं सभी से निवेदन करता हूं कि ऐसा कोई कार्य न करें जिससे पार्टी या क्षेत्र को नुकसान हो।” उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट देना या न देना पार्टी का आंतरिक मामला है और अपनी बात रखने के लिए संवैधानिक पार्टी फोरम का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि हिंसा का।

पार्टी नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती

नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश बीजेपी के सबसे कद्दावर और प्रमुख नेताओं में से एक माने जाते हैं। दतिया में उनके समर्थकों द्वारा दिखाई गई इस आक्रामक मुद्रा ने बीजेपी आलाकमान के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस अनुशासनहीनता और हिंसक प्रदर्शन पर क्या कार्रवाई करता है। क्या पार्टी नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव को देखते हुए कोई नरम रुख अपनाएगी या फिर दतिया उपचुनाव में अपनी साख बचाने के लिए कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाएगी? फिलहाल, दतिया का चुनावी माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है और यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस पूरे विवाद का निपटारा कैसे करती है।

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Chandan Das

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