Surguja Case: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में घटित एक दुखद घटना ने पूरे सहकारिता विभाग में हड़कंप मचा दिया है। बतौली क्षेत्र में सोसायटी मैनेजर दिनेश गुप्ता द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में अब बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है। जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन मैनेजर भूपेंद्र सिंह परिहार के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। यह मामला महज एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि इसके पीछे वर्षों से चल रहा आर्थिक शोषण और भ्रष्टाचार का एक काला अध्याय छिपा है। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि मृतक मैनेजर मानसिक प्रताड़ना के उस चरम पर पहुंच चुका था, जहां से उसे मौत के अलावा और कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया।

मृतक के नाम पर 52 लाख का फर्जी केसीसी लोन
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाले हैं। आरोपी बैंक मैनेजर भूपेंद्र सिंह परिहार पर आरोप है कि उसने दिनेश गुप्ता के नाम का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी की। आरोपी ने दिनेश की जानकारी के बिना उनके नाम पर कुल 52 लाख रुपये का केसीसी (KCC) लोन स्वीकृत करवा लिया। जब दिनेश को इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो आरोपी ने अपना गुनाह छुपाने के लिए उन्हें डराना-धमकाना शुरू कर दिया। सूत्रों के अनुसार, आरोपी मैनेजर न केवल उन्हें प्रताड़ित करता था, बल्कि पैसे वापस न कर पाने की स्थिति में नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी भी देता था, जिससे दिनेश गहरे तनाव में थे।

मानसिक प्रताड़ना और न्याय के लिए संघर्ष
दिनेश गुप्ता के परिवार का आरोप है कि बैंक मैनेजर की इस काली करतूत ने दिनेश की जिंदगी को नर्क बना दिया था। उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुके थे। एक ईमानदार कर्मचारी के लिए अपने नाम पर हुए इस भ्रष्टाचार का बोझ उठाना मुश्किल हो गया था। जब आरोपी मैनेजर ने प्रताड़ना की सीमाएं पार कर दीं, तो दिनेश ने आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर काफी आक्रोश देखा गया था और परिजन लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे थे। अब FIR दर्ज होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन बैंक प्रणाली में व्याप्त इस तरह के भ्रष्टाचार पर अब भी बड़े सवाल बने हुए हैं।
पुलिसिया जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई
वर्तमान में पुलिस इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। बैंक के रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस 52 लाख के फर्जीवाड़े में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी भूपेंद्र सिंह परिहार की भूमिका संदिग्ध है और उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन की फॉरेंसिक ऑडिट भी की जा सकती है। यह घटना सहकारिता विभाग के लिए एक आईना है, जो यह बताती है कि कैसे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के कारण एक बेगुनाह व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न दोहराई जाए।











