AI Race: पिछले साल की शुरुआत तक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में अमेरिका का एकछत्र राज माना जाता था। ओपनएआई और गूगल जेमिनी जैसे नामों का बोलबाला था, जबकि चीन का ‘डीपसीक’ विवादों में उलझकर हाशिए पर चला गया था। हालांकि, महज 14 महीनों के भीतर परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के टॉप-50 एआई मॉडलों में आज लगभग 40 फीसदी मॉडल चीन के हैं। मई 2026 तक चीनी मॉडलों की संख्या 20 तक पहुंच गई है, जबकि इसी दौरान अमेरिकी मॉडलों का दबदबा 33 से घटकर 28 के स्तर पर आ गया है। यह आंकड़ों में आया बड़ा बदलाव यह साबित करता है कि चीन ने तकनीकी मोर्चे पर जबरदस्त छलांग लगाई है।

टोकन खपत में चीन का दबदबा: उपयोगिता में अमेरिका से आगे
एआई की ताकत का आकलन अक्सर ‘टोकन्स’ के उपयोग से किया जाता है, जो किसी मॉडल की कार्यक्षमता और उसकी स्वीकार्यता को दर्शाता है। इस मोर्चे पर चीनी मॉडल अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को काफी पीछे छोड़ चुके हैं। जून महीने के आंकड़े हैरान करने वाले हैं; चीनी टॉप-20 मॉडलों ने कुल 98 ट्रिलियन टोकन प्रोसेस किए, जबकि अमेरिकी मॉडलों का आंकड़ा केवल 53 ट्रिलियन तक ही सीमित रहा। मई से जून के बीच चीनी एआई की उपयोगिता में 113% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी मॉडलों की वृद्धि दर केवल 43% रही। इतना ही नहीं, चीन में एआई टोकन की खपत पिछले दो वर्षों में 1000 गुना बढ़ी है। साल 2024 की शुरुआत में रोजाना 100 अरब टोकन की खपत थी, जो 2025 के अंत तक बढ़कर 100 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।

एआई तकनीक पर बढ़ी प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा घेराबंदी
चीन और अमेरिका के बीच एआई को लेकर प्रतिस्पर्धा अब ‘कोल्ड वॉर’ जैसी स्थिति में पहुंच गई है। दोनों देश अपनी अत्याधुनिक तकनीक को एक-दूसरे की पहुंच से दूर रखने के लिए कठोर कदम उठा रहे हैं। अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने चीन को अपने अत्याधुनिक मॉडल जैसे ‘मायथॉस 5’ और ‘फेबल 5’ तक पहुंच से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके जवाब में चीन भी पीछे नहीं है; अलीबाबा जैसी दिग्गज चीनी कंपनियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए अपने कर्मचारियों के एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड’ टूल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है और उन्हें अपने स्वयं के ‘क्लोडर’ टूल पर स्विच करने का निर्देश दिया है। यह आपसी अविश्वास और सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को स्पष्ट करता है।
आरोप-प्रत्यारोप और भविष्य की चुनौतियां
दोनों देशों के बीच चल रहा यह तकनीकी युद्ध अब कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी कंपनियों ने चीन पर एआई मॉडलों की तकनीक चोरी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके चलते एंथ्रोपिक ने अमेरिकी सरकार से चीन को होने वाले चिप निर्यात पर और भी सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की है। दूसरी ओर, चीन ने भी अपने एआई मॉडलों के वैश्विक विस्तार को सीमित करना शुरू कर दिया है। एआई का निर्माण और उसका व्यापक उपयोग, दोनों ही मामलों में चीन अब अमेरिका को सीधी टक्कर दे रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य अब केवल अमेरिका की प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने वाला एक प्रमुख कारक बन चुका है।
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