Measles Cases : सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले बगडोली गांव में संक्रामक बीमारी ‘खसरा’ (मिजल्स) ने दस्तक दे दी है। हाल ही में हुई जांच में क्षेत्र के छह बच्चे इस वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। यह संक्रमण तब प्रकाश में आया जब कुछ बच्चों में बुखार और शरीर पर लाल दाने जैसे लक्षण दिखाई दिए। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात बरतते हुए संदिग्ध लक्षणों वाले 15 बच्चों के सैंपल लेकर उन्हें जबलपुर स्थित इम्यूनोलॉजी लैब में जांच के लिए भेजा था। लैब से आई रिपोर्ट में छह बच्चों में मिजल्स की पुष्टि हुई है। इस खबर के बाद से स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में युद्धस्तर पर रोकथाम के उपाय शुरू कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई और सर्वेक्षण
मिजल्स की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को और महामारी नियंत्रण अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम को बगडोली गांव भेजा गया। वहां स्वास्थ्य शिविर लगाकर व्यापक स्तर पर बच्चों का सर्वे किया गया है। प्रभावित गांव में न केवल संक्रमित बच्चों का उपचार किया जा रहा है, बल्कि अन्य बच्चों को विटामिन-ए का घोल पिलाया जा रहा है और उनका टीकाकरण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे जिले में अलर्ट घोषित कर दिया है ताकि संक्रमण को अन्य क्षेत्रों में फैलने से रोका जा सके।

खसरा के लक्षण और स्वास्थ्य जोखिम
चिकित्सकों के अनुसार, खसरा मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते (दाने) उभरना शामिल है। अक्सर ग्रामीण अंचलों में लोग इसे ‘छोटी माता’ जैसी सामान्य बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन यह खसरा का खतरनाक वायरस हो सकता है। खसरा के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) तेजी से गिर जाती है, जिससे उन्हें सर्दी-खांसी के साथ निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। समय पर इलाज न मिलने से बच्चे कुपोषण और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो सकते हैं, जो कई बार उनकी जान के लिए संकट बन जाता है।
पूरे जिले में अलर्ट और सतत निगरानी
महामारी नियंत्रण अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि जिले के सभी विकासखंडों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कहा गया है कि यदि पांच वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे में बुखार या लाल दाने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी जाए। पहले संक्रामक रोगों के सर्वे का कार्य विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा किया जाता था, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्वयं जमीनी स्तर पर निगरानी रख रही हैं। सीतापुर की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है और हर ब्लॉक में बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और टीकाकरण अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
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