Hormuz Strait: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव ने एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक धमनियों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। ईरान का दावा है कि इस क्षेत्र में विदेशी शक्तियों, विशेषकर अमेरिका का ‘अवैध हस्तक्षेप’ बढ़ता जा रहा है, जिसके विरोध में यह कड़ा कदम उठाया गया है। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, जब तक अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, तब तक किसी भी जहाज को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अमेरिकी सैन्य हमले और ‘GFS Galaxy’ पर हुआ हमला
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सप्ताह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का तीसरा चरण शुरू कर दिया है। यह जवाबी कार्रवाई साइप्रस के ध्वज वाले कंटेनर जहाज ‘M/V GFS Galaxy’ पर हुए कथित हमले के बाद की गई है। अमेरिकी सेना का आरोप है कि जब यह जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पास से गुजर रहा था, तब उस पर हमला किया गया था। इस घटना के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा की गई इन सैन्य स्ट्राइक्स ने क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: ‘ईरान पर होगी जबरदस्त सैन्य कार्रवाई’
तनाव के इस दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ के जरिए ईरान को सीधे चेतावनी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि यदि ईरान उनकी हत्या की किसी भी साजिश को अंजाम देने की कोशिश करता है, तो अमेरिका की ओर से अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका की मिसाइलें पूरी तरह तैयार हैं और उनमें ईरान के प्रमुख इलाकों को पल भर में तबाह करने की क्षमता है। राष्ट्रपति की इस बयानबाजी ने कूटनीतिक तनाव को और अधिक गहरा कर दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर मंडराया बड़ा खतरा
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह समुद्री मार्ग है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल और गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस स्ट्रेट के बंद होने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ना तय है। यदि यह जलमार्ग लंबे समय तक अवरुद्ध रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह चरमरा सकती है, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ जाएगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक स्तर पर इस संकट को टालने की कोई कोशिश की जाएगी, या फिर यह सैन्य तनाव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले लेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन वैश्विक भू-राजनीति के लिहाज से बेहद नाजुक साबित हो सकते हैं।











