Health Tips: गर्मी का मौसम आते ही रसीले और मीठे आमों की खुशबू से बाजार गुलजार हो जाते हैं। आम हर भारतीय घर की पहली पसंद होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली तक पहुँचने वाला आम प्राकृतिक रूप से पका है या उसे हानिकारक रसायनों (केमिकल्स) की मदद से तैयार किया गया है? न्यूरोलॉजिस्ट और जनरल फिजिशियन डॉ. प्रियंका सेहरावत का कहना है कि मुनाफा कमाने की होड़ में कई व्यापारी आमों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग करते हैं। ऐसे आम दिखने में आकर्षक और चमकीले जरूर हो सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से ये आपके परिवार के लिए घातक साबित हो सकते हैं। इन खतरनाक फलों से बचाव के लिए इनका अंतर समझना बेहद जरूरी है।

क्यों किया जाता है कार्बाइड का इस्तेमाल?
डॉ. प्रियंका सेहरावत के अनुसार, आमों को बाजार में जल्दी उतारने और उन्हें कम समय में पका हुआ दिखाने के लिए कार्बाइड का सहारा लिया जाता है। जब कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आता है, तो यह ‘एसिटिलीन’ जैसी गैस छोड़ता है, जो फलों को कृत्रिम रूप से पका देती है। यह प्रक्रिया प्रकृति के सामान्य चक्र को जबरन तेज कर देती है। यही कारण है कि ऐसे आम बाहर से तो पूरी तरह पके और आकर्षक दिखते हैं, लेकिन अंदर से वे कच्चे और बेस्वाद रह जाते हैं। यह प्रक्रिया न केवल आम की गुणवत्ता को गिराती है, बल्कि इसमें मौजूद हानिकारक रसायन शरीर में जाकर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं।

पहचानें प्राकृतिक और कृत्रिम रूप से पके आम का अंतर
आम खरीदते समय केवल उसका गहरा पीला रंग देखकर न ललचाएं, क्योंकि यही सबसे बड़ा धोखा हो सकता है। कार्बाइड से पके आमों की त्वचा पर कहीं-कहीं हरे धब्बे हो सकते हैं, लेकिन वे जरूरत से ज्यादा चमकदार और एक समान पीले दिखते हैं। इसके विपरीत, प्राकृतिक रूप से पके आमों का रंग थोड़ा असमान हो सकता है। सबसे मुख्य पहचान उसकी खुशबू है; प्राकृतिक आमों में एक धीमी और मीठी खुशबू होती है, जबकि कार्बाइड वाले आमों में वह स्वाभाविक महक गायब होती है। यदि आम दिखने में बहुत सुंदर और चमक रहा है, लेकिन उसमें से कोई खास खुशबू नहीं आ रही, तो सावधान हो जाना ही बेहतर है।
स्वाद और बनावट भी है सावधानी का पैमाना
आम के स्वाद और उसकी आंतरिक बनावट से भी आप सच का पता लगा सकते हैं। यदि आम बाहर से छूने में सख्त लगे लेकिन काटने पर अंदर का गूदा जरूरत से ज्यादा मुलायम या पानी जैसा महसूस हो, तो समझ लें कि यह रसायनों की देन है। ऐसे आमों का स्वाद अक्सर फीका होता है या उसमें अजीब सी कड़वाहट महसूस हो सकती है। प्राकृतिक रूप से पके आम अंदर तक रसीले, रेशेदार और अत्यंत स्वादिष्ट होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा यही सलाह देते हैं कि चमक-दमक के पीछे न भागें और सदैव भरोसेमंद विक्रेताओं या मौसमी फलों के सही समय का इंतजार करें। अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बाजार में आम चुनते समय थोड़ी सतर्कता और समझदारी बरतना बेहद आवश्यक है।
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