CG Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र सोमवार, 13 जुलाई 2026 को पूरे औपचारिक माहौल के साथ शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत बेहद भावपूर्ण रही, जहाँ सदन के पटल पर पद्म विभूषण से सम्मानित छत्तीसगढ़ की लोक कला की गौरव, तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी गई। दिवंगत विभूतियों को नमन करने के बाद सदन की कार्यवाही विधिवत रूप से शुरू हुई। सत्र के पहले ही दिन से विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति स्पष्ट कर दी थी, जिसका असर प्रश्नकाल के दौरान साफ देखने को मिला। सदन की गरिमा के साथ शुरू हुई इस कार्यवाही में जनता से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहस की उम्मीद पहले से ही जताई जा रही थी।

बीएड-डीएड कोर्स और रिक्त पदों पर तीखे सवाल
प्रश्नकाल के दौरान राज्य के शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा चर्चा का केंद्र रहा। कोंडागांव की विधायक लता उसेंडी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने विशेष रूप से महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में संचालित डी.एड. और बी.एड. पाठ्यक्रमों की बदहाल स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया। विधायक ने सदन को अवगत कराया कि उक्त विश्वविद्यालय में इन पाठ्यक्रमों के लिए कुल 265 पद स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 29 पदों पर ही नियुक्तियां हुई हैं। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि शेष रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया कब तक पूर्ण की जाएगी। साथ ही, उन्होंने पूर्व में की गई नियुक्तियों में धांधली और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों की जांच निष्पक्ष रूप से नहीं की गई है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है।

उच्च शिक्षा मंत्री का आश्वासन और सरकार का रुख
विधायक लता उसेंडी द्वारा उठाए गए इन गंभीर सवालों का जवाब देने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा खड़े हुए। उन्होंने सदन को स्पष्ट किया कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में डी.एड. और बी.एड. पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। पदों की रिक्तता को स्वीकार करते हुए उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि खाली पड़े पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता के प्रति गंभीर है और नियुक्तियों को पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। शिकायतों के संबंध में मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि पुरानी भर्तियों में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायतें हैं, तो उनकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर काफी हंगामेदार रहने वाला है। महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शिक्षकों के इतने बड़े पैमाने पर पद रिक्त होना निश्चित रूप से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। विपक्ष ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह केवल आश्वासन से काम नहीं चलाने देगी, बल्कि इन नियुक्तियों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के लिए दबाव बनाए रखेगी। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्री के आश्वासन पर सरकार कितनी जल्दी अमल करती है और क्या वाकई में प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में खाली पड़े हजारों पदों को भरकर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकेगा।
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