Ram Mandir Donation Row : अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित चोरी के मामले ने अब कानूनी रूप से तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आधिकारिक नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि इस मामले में जांच प्रक्रिया जारी है, लेकिन शीर्ष अदालत इसकी निगरानी और प्रगति के प्रति गंभीर है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को भी अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि फिलहाल यह रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को नहीं दी जाएगी, बल्कि इसे सीलबंद लिफाफे में सीधे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई यानी सोमवार को निर्धारित की गई है।

निष्पक्ष जांच की मांग: CBI और फॉरेंसिक ऑडिट पर जोर
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में ‘हिंदू धर्म परिषद’ सहित कुल चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग में इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि दायर याचिकाओं में सीबीआई (CBI) से जांच कराने की मांग के साथ-साथ मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मामला अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसी या SIT की निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। इससे पूर्व, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की तात्कालिकता और गंभीरता को देखते हुए इसे गर्मियों की छुट्टियों के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।

सार्वजनिक न्यास और चढ़ावे की सुरक्षा का कानूनी पहलू
वरिष्ठ वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर रिट याचिका में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि सार्वजनिक मंदिरों में प्राप्त दान ‘पवित्र न्यास संपत्ति’ (Trust Property) होती है, जो कानूनी रूप से देवता में निहित है। याचिका में तर्क दिया गया है कि मंदिर के चढ़ावे का प्रबंधन करने वाले न्यासी (Trustees) पारदर्शिता, जवाबदेही और संरक्षण के संवैधानिक कर्तव्यों से बंधे होते हैं। याचिका में मांग की गई है कि दान से संबंधित सभी अभिलेखों, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग को तत्काल प्रभाव से संरक्षित किया जाए ताकि भविष्य में साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था की मांग
याचिकाकर्ताओं ने केवल वर्तमान चोरी की घटना की जांच ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक व्यापक दिशा-निर्देश की भी मांग की है। कोर्ट से यह अपील की गई है कि राष्ट्रीय महत्व के मंदिरों में जनता द्वारा दिए जाने वाले दान को पारदर्शी तरीके से संभालने के लिए एक सुदृढ़ संवैधानिक व्यवस्था और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह सहित अन्य याचिकाकर्ताओं का मानना है कि मंदिर प्रशासन में जवाबदेही तय होना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में भविष्य के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और दान की राशि दोनों सुरक्षित रहें। अब सबकी निगाहें 20 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ से मामले की दिशा तय होगी।











