Mosquito Bite : गर्मियों और बरसात के मौसम की शुरुआत होते ही मच्छरों का आतंक काफी बढ़ जाता है। शाम ढलते ही ये छोटे-छोटे कीट हमारे घरों में सक्रिय हो जाते हैं और इंसानी शरीर को अपना निशाना बनाने लगते हैं। अक्सर आपने गौर किया होगा कि मच्छर के काटते ही उस स्थान पर तेज खुजली शुरू हो जाती है और कुछ ही देर में वहां एक लाल रंग का उभरा हुआ निशान या सूजन वाला ‘गुब्बारा’ बन जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि एक नन्हा सा जीव काटने के बाद शरीर में ऐसी प्रतिक्रिया क्यों पैदा करता है? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रक्रिया छिपी है, जिसे समझना काफी रोचक है।

मच्छर की लार और रक्त को तरल रखने की तकनीक
इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत तब होती है जब एक मादा मच्छर आपकी त्वचा पर बैठती है। मच्छर के डंक (प्रोबोसिस) में ऐसी अद्भुत क्षमता होती है कि वह बहुत ही सूक्ष्म तरीके से त्वचा को छेद देता है। खून चूसने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, मादा मच्छर हमारी त्वचा के भीतर अपनी लार (Saliva) इंजेक्ट करती है। इस लार में विशेष प्रकार के ‘एंटी-कोगुलेंट्स’ यानी थक्का-रोधी प्रोटीन होते हैं। इनका मुख्य काम हमारे रक्त को उस स्थान पर जमने से रोकना होता है, ताकि मच्छर बिना किसी रुकावट के लगातार और आसानी से अपना भोजन (रक्त) प्राप्त कर सके। यदि ये प्रोटीन न हों, तो रक्त जल्दी जम जाएगा और मच्छर के लिए उसे चूसना मुश्किल हो जाएगा।

शरीर का इम्यून सिस्टम और सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया
जैसे ही मच्छर की लार हमारे रक्तप्रवाह और त्वचा के ऊतकों के संपर्क में आती है, हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) तुरंत सक्रिय हो जाता है। शरीर को यह आभास होता है कि कोई बाहरी और संभावित हानिकारक तत्व उसके भीतर प्रवेश कर गया है। इस बाहरी हमले से निपटने और बचाव करने के लिए, हमारा इम्यून सिस्टम तुरंत ‘हिस्टामाइन’ (Histamine) नामक एक विशेष केमिकल रिलीज करना शुरू कर देता है। यह केमिकल हमारे शरीर के बचाव तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो किसी भी एलर्जी या बाहरी तत्व के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार रहता है।
खुजली, लाली और सूजन का असली वैज्ञानिक कारण
वास्तव में, हिस्टामाइन ही वह मुख्य कारक है जो खुजली और सूजन के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होता है। जब हिस्टामाइन उस हिस्से पर रिलीज होता है, तो यह काटे गए स्थान के आसपास की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को फैला देता है। इसके परिणामस्वरूप, उस विशिष्ट स्थान पर रक्त का प्रवाह अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे वहां की त्वचा लाल पड़ जाती है और सूजन यानी एक उभार सा बन जाता है। साथ ही, हिस्टामाइन वहां मौजूद तंत्रिका तंत्र (नसों) को अत्यधिक उत्तेजित कर देता है, जिससे हमारे मस्तिष्क को लगातार संकेत जाता है कि उस हिस्से में कुछ असामान्यता है। यही ‘सिग्नल’ हमें खुजली के रूप में महसूस होता है, जो बार-बार उस जगह को खुजलाने की इच्छा पैदा करता है। यही कारण है कि मच्छर के काटते ही हमें उस जगह पर बेचैनी और खुजली महसूस होती है।












