Sonam Wangchuk Protest: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले ने देश भर के युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी कड़ी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को पार्टी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए देश के तमाम राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं को पत्र लिखकर छात्रों के इस संघर्ष में खुलकर समर्थन करने की अपील की है।

इस विशेष आमंत्रण पत्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ-साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी मुख्य रूप से आमंत्रित किया गया है। पार्टी का मानना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर युवाओं के भविष्य के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए। इतना ही नहीं, दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार और राजनेता थलपति विजय समेत कई दिग्गज हस्तियों को भी इस आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए न्योता भेजा गया है।

सोनम वांगचुक के अनशन से देश में चिंता की लहर
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का 17 दिनों से जारी भूख हड़ताल देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए देश की 1800 से अधिक बड़ी शख्सियतों ने एक खुला पत्र जारी कर उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। समर्थन करने वालों में नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, अरुंधति रॉय, ज्यां द्रेज, जयंती घोष और निवेदिता मेनन जैसी प्रख्यात हस्तियां शामिल हैं।
वहीं, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एनसीपी नेता रोहित पवार और समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज सहित कई राजनेताओं ने भी वांगचुक के स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारतीय किसान यूनियन के नेताओं और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार से स्थिति का संज्ञान लेने और वांगचुक से अनशन तोड़ने की भावुक अपील की है। फिल्म अभिनेता ओमी वैद्य ने भी एक वीडियो जारी कर फुंसुख वांगडू के प्रेरणास्रोत रहे सोनम वांगचुक के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।
केजरीवाल का समर्थन और संसद मार्च की तैयारी
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को अपना समर्थन दिया है। केजरीवाल ने घोषणा की कि वे स्वयं गुरुवार, 16 जुलाई को शाम 5 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाएंगे। उन्होंने सोनम वांगचुक को देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, आंदोलनरत छात्रों ने 20 जुलाई को मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ ही ‘संसद मार्च’ का आह्वान किया है, ताकि उनकी आवाज सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँच सके।
जंतर-मंतर की रात: उम्मीद और संकल्प की एक अलग दुनिया
दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर दौड़ते वाहनों के शोर से दूर, जंतर-मंतर का नजारा एक अलग ही कहानी बयां करता है। रात के 10 बज चुके हैं, लेकिन यहां का जोश कम नहीं हुआ है। ऊपर काले तिरपाल और नीचे बिछी चादरों के बीच 20 से 30 वर्ष के युवा अपने संघर्ष को जीवित रखे हुए हैं। यहां विरोध प्रदर्शन सिर्फ नारों तक सीमित नहीं है; एक कोने में गिटार की धुन पर इंकलाबी तराने गूंज रहे हैं, तो कहीं छोटे-छोटे समूहों में शिक्षा नीति, बेरोजगारी और संविधान पर गंभीर चर्चाएं चल रही हैं। मंच के पास सोनम वांगचुक शांत लेटे हुए हैं, जबकि उनके आसपास पोस्टर लगे हैं जिन पर लिखा है—’सरकार हमें जीने दो’, ‘परीक्षाओं में पारदर्शिता चाहिए’। यह भीड़ संख्या में बहुत बड़ी न सही, लेकिन अपने संकल्प में अदम्य है।
विरोध में आवाज के साथ ठहराव की शक्ति
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवाओं के चेहरे थकान से जरूर भरे हैं, लेकिन उनकी आंखों में बदलाव की उम्मीद स्पष्ट दिखती है। यह जंतर-मंतर का वह स्वरूप है जहां विरोध सिर्फ शोर नहीं, बल्कि एक ठहराव भी है। कोई हड़बड़ी नहीं है, कोई जल्दबाजी नहीं है—बस एक अटूट धैर्य है। इन युवाओं का मानना है कि वे यहां सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज कराने नहीं, बल्कि व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग लेकर आए हैं।
रात की खामोशी में गूंजते गीत और बैनरों पर लिखे शब्द इस बात के गवाह हैं कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी शिक्षा प्रणाली को एक नई और पारदर्शी दिशा देने की एक ईमानदार कोशिश है। जंतर-मंतर की यह रात इस बात की प्रतीक है कि जब युवाओं का हौसला बुलंद हो, तो लंबी रातें भी बदलाव की सुबह का रास्ता तैयार कर देती हैं।
Read More : Hormuz Crisis: होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू, अमेरिकी सेना ने चौथे दिन भी बम बरसाए












