Hormuz Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर कड़े प्रतिबंध लगाते हुए नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी है, जिसका मुख्य उद्देश्य तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह रोकना है। गौरतलब है कि अप्रैल से जून के बीच भी अमेरिकी नौसेना ने ऐसी ही नाकेबंदी की थी, और यह दूसरी बार है जब इस तरह का कड़ा कदम उठाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार चौथे दिन ईरान के प्रमुख बंदरगाहों, जैसे सिरिक और पोर्ट सिटी बंदर अब्बास में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। वहीं, ईरान की सरकारी मीडिया ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य उपकरणों को निशाना बनाने का दावा करके संघर्ष को और अधिक हवा दी है।

ट्रंप का अल्टीमेटम: ‘समझौता करो, वरना कुछ नहीं बचेगा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव की नीति को चरम पर पहुँचा दिया है। एक हालिया साक्षात्कार में ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें, वरना आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर अमेरिकी सेना के हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक तेहरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके प्रतिनिधि लगातार ईरानी पक्ष के संपर्क में हैं और यह संदेश उन्हें स्पष्ट रूप से दे दिया गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें ईरान से समझौते की उम्मीद है, तो उन्होंने अनिश्चितता जाहिर की, लेकिन अपनी सख्त चेतावनी पर कायम रहे।

शुल्क संबंधी बयान से पलटे ट्रंप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के अपने पूर्ववर्ती बयान पर रुख बदल लिया है। उन्होंने अब कहा है कि इसके बजाय खाड़ी के देश अमेरिका में निवेश को बढ़ावा देंगे। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए हर संभव सावधानी बरत रहा है। हालांकि, उनके बयान से यह स्पष्ट है कि ईरान को वित्तीय और सामरिक तौर पर पूरी तरह अलग-थलग करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
नेतृत्व पर सवाल और वैश्विक बाजार पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व पर भी सीधा हमला किया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई की पकड़ सत्ता पर अब 90 प्रतिशत तक कमजोर हो चुकी है। इस सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है, जहाँ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। पश्चिम एशिया में शुरू हुई इस नई लड़ाई ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है और पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। दुनिया अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या तेहरान इस अत्यधिक दबाव के आगे झुककर समझौते के लिए तैयार होगा या यह संघर्ष और व्यापक रूप लेगा।
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