Badrinath Temple : उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान के प्रबंधन में सामने आई कथित अनियमितताओं के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। समिति ने मंदिर के कोषाध्यक्ष संदेश मेहता को उनके पद से हटा दिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब मंदिर के लॉकर में मौजूद चांदी की मात्रा और रजिस्टर में दर्ज आंकड़ों में विसंगति पाई गई और रिकॉर्ड में ‘ओवरराइटिंग’ के प्रमाण मिले। बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने पुष्टि की कि मेहता को उनके पद से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया है, और कोषाध्यक्ष की नई जिम्मेदारी पूजा काउंटर पर तैनात कर्मचारी केदार सिंह को सौंपी गई है।

उच्चस्तरीय समिति ने शुरू की गहन जांच
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपना कार्य तेज कर दिया है। गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित इस तीन सदस्यीय समिति ने मंदिर पहुंचकर साक्ष्यों का संकलन शुरू किया है। इस समिति में जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और स्वास्थ्य विभाग के वित्त निदेशक जगत सिंह चौहान भी शामिल हैं। समिति ने मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का निरीक्षण किया और नकद गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) के दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान आम श्रद्धालुओं के बयान भी दर्ज किए जाएंगे और तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से सीसीटीवी फुटेज व अन्य डिजिटल रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।

आरोपी कर्मचारी की गिरफ्तारी और सख्त रुख
जांच समिति उन सभी बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो दान की गणना प्रक्रिया, हुंडी से लेकर काउंटिंग रूम तक की सुरक्षा और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं। इस विवाद का मुख्य केंद्र मंदिर समिति का निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल है। दो जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुए अनियमितता के आरोपों के बाद बीकेटीसी ने आंतरिक जांच कराई थी, जिसके आधार पर नौटियाल को सात जुलाई को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद बद्रीनाथ थाने में दर्ज मुकदमे की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन हुआ। एसआईटी को ठोस साक्ष्य मिलने के बाद 12 जुलाई की रात प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो इस पूरे घोटाले की कड़ियों को खोलने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
सुधार की राह पर मंदिर प्रशासन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों पर गठित यह समिति न केवल कथित वित्तीय गड़बड़ियों की तह तक जाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार के ठोस सुझाव भी देगी। मंदिर समिति इस बात को लेकर आश्वस्त है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। बद्रीनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, और वहां दान-चढ़ावे की पवित्रता को बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। समिति द्वारा दी जाने वाली सिफारिशें भविष्य में मंदिर के दान प्रबंधन में तकनीक और जवाबदेही को और मजबूत करेंगी। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और श्रद्धालु जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।












