Flying Squirrel : उत्तराखंड स्थित विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों के शानदार परिणाम सामने आ रहे हैं। जैव विविधता से समृद्ध इन क्षेत्रों में अब ऐसे दुर्लभ जीवों का दिखना आम हो गया है, जो काफी समय से या तो लुप्तप्राय माने जा रहे थे या फिर उनकी उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ थी। इसी कड़ी में, कॉर्बेट की कोसी रेंज के अंतर्गत आने वाले ग्राम टेड़ा में एक अत्यंत दुर्लभ निशाचर जीव ‘उड़न गिलहरी’ (फ्लाइंग स्क्विरेल) देखे जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस जीव के अचानक एक ग्रामीण के घर में प्रवेश करने से न केवल स्थानीय निवासियों में कौतूहल मच गया, बल्कि यह खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।

वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित बचाव
ग्रामीणों द्वारा तत्काल सूचना मिलने के बाद, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की वन विभाग की टीम ने बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया। रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे सलमान अंसारी और कोसी रेंज के आशीष कश्यप ने अपनी तत्परता और दक्षता का परिचय देते हुए इस दुर्लभ जीव को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के उपरांत, वन विभाग के पशु चिकित्सकों द्वारा इस उड़न गिलहरी का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह पूरी तरह स्वस्थ है। सुरक्षित पाए जाने के बाद, टीम ने उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी नजदीकी घने जंगलों में वापस छोड़ दिया। रेस्क्यू टीम के सदस्य सलमान अंसारी ने बताया कि यह जीव बेहद संवेदनशील होता है और साल 2024 में भी इसी प्रजाति को कॉर्बेट के जंगलों में देखा गया था, जो यहां के पारिस्थितिक तंत्र की मजबूती को दर्शाता है।

उड़न गिलहरी की विशेषताएं और प्राकृतिक आवास
वन विशेषज्ञों के अनुसार, उड़न गिलहरी मुख्य रूप से एक निशाचर जीव है, जो पूरी तरह से रात के अंधेरे में ही सक्रिय होती है। यही कारण है कि यह बहुत कम दिखाई देती है और इसे देख पाना अपने आप में एक दुर्लभ घटना है। इनके भोजन की आदतों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह जीव मुख्य रूप से पेड़ों की छाल, मूंगफली, मेवे और विभिन्न प्रकार के बीजों का सेवन करना पसंद करती है। पारिस्थितिक दृष्टिकोण से, रामगंगा नदी के आसपास का दलदली इलाका और वहां मौजूद सघन वन क्षेत्र इस उड़न गिलहरी के लिए सबसे अनुकूल और आदर्श प्राकृतावास माने जाते हैं।
प्रशासन की निगरानी और भविष्य के संरक्षण कदम
कॉर्बेट पार्क के वार्डन बिंदरपाल ने इस दुर्लभ जीव की उपस्थिति को वन विभाग की बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के अनुकूल माहौल और सुरक्षित वातावरण होने के कारण ही आज ऐसे दुर्लभ और विलुप्तप्राय जीव यहां फल-फूल रहे हैं। दूसरी ओर, रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ ध्रुव सिंह मार्तोलिया ने इस विचित्र और संवेदनशील जीव की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने वन कर्मियों को उस विशेष क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ाने को कहा है, ताकि किसी भी प्रकार की मानवीय छेड़छाड़ न हो और इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण को और अधिक पुख्ता किया जा सके। प्रशासन का यह कदम क्षेत्र की जैव विविधता को अक्षुण्ण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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