US Iran Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर अत्यंत खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने और जहाजों पर हमलों की घटनाओं के बाद, अमेरिका ने 14 जुलाई से ईरान पर एक बार फिर कड़ी समुद्री नाकाबंदी लागू कर दी है। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जून में एक अस्थायी समझौते के तहत इस नाकाबंदी को हटा लिया गया था, लेकिन मौजूदा हालात ने अमेरिका को कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट किया है कि ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले सभी जहाजों की गहन निगरानी की जा रही है और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले किसी भी जलपोत के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलों से बढ़ा संघर्ष
समुद्री नाकाबंदी के साथ ही अमेरिका ने ईरान के भीतर कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। बुधवार को किए गए इन हमलों में बंदर अब्बास, बुशहर, केश्म द्वीप और खोर्मुज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र निशाने पर रहे। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित एक सैन्य बैरक पर हुए मिसाइल हमले में सात सैनिकों की जान चली गई। वहीं, देश भर में हुए इन हमलों में मृतकों की संख्या 35 के पार पहुँच गई है और 300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में से 72 लोगों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

व्यापारिक जहाजों पर सख्ती और सैन्य कार्रवाई
नाकाबंदी लागू होने के महज 24 घंटे के भीतर अमेरिकी सेना ने अपना सख्त रवैया प्रदर्शित करते हुए कुराकाओ के झंडे वाले एक तेल टैंकर ‘बेलमा’ को अपनी कार्रवाई का निशाना बनाया। अमेरिकी दावों के अनुसार, चेतावनी के बावजूद दिशा न बदलने पर इस टैंकर को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय कर दिया गया। इसी दौरान दो अन्य व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए अपनी दिशा बदल ली। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के किसी भी प्रभाव को रोकने के लिए अत्यधिक आक्रामक नीति अपना रहा है।
ईरान की जवाबी चेतावनी और क्षेत्रीय अस्थिरता
इस सैन्य दबाव के जवाब में ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर कलीबाफ ने किसी भी बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहने की बात कही है। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को चेतावनी के दायरे में लेते हुए कहा है कि “या तो सभी देशों का तेल-गैस निर्यात होगा या फिर किसी का नहीं।” तनाव का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है, जहाँ बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किया गया है। जॉर्डन ने भी अपनी सीमा में तीन मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने शांति समझौते का उल्लंघन किया है।
भविष्य की अनिश्चितता और कूटनीतिक दावे
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान एक नया मोड़ लेकर आया है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अब शांति समझौता करने का इच्छुक है, हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस विवरण साझा नहीं किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का प्रभाव स्पष्ट है और आगामी भविष्य पूरी तरह से ईरान के रुख पर निर्भर करेगा। मध्य पूर्व की यह स्थिति वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। दुनिया भर की निगाहें अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।
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