Bihar Politics : बिहार की राजनीति में इन दिनों कयासों का बाजार गर्म है। इसका मुख्य कारण है राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के औरंगाबाद से सांसद अभय कुशवाहा की बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से हुई अचानक मुलाकात। बुधवार को जब अभय कुशवाहा ने पटना में सम्राट चौधरी के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की, तो इसकी तस्वीरें सामने आते ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि, यह मुलाकात औपचारिक दिख रही थी, लेकिन इसके समय और परिदृश्य ने बिहार की राजनीति में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। भविष्य में बनने वाले संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक पंडित अपने-अपने तरीके से इसके अर्थ निकाल रहे हैं।

मुलाकात पर क्या है आधिकारिक और पार्टी का रुख?
इस हाई-प्रोफाइल भेंट को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इसे एक ‘शिष्टाचार भेंट’ (Courtesy Meeting) करार दिया गया है। वहीं, राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने भी इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि इसे राजनीतिक चश्मे से देखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांसद अभय कुशवाहा अपने संसदीय क्षेत्र औरंगाबाद के विकास कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए उपमुख्यमंत्री से मिलने गए थे। राजद की ओर से इसे पूरी तरह से प्रशासनिक और विकासोन्मुखी बताया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी को शुरू में ही दूर किया जा सके।

क्या बिहार में भी दोहराया जाएगा दलबदल का इतिहास?
जानकारों का मानना है कि केवल शिष्टाचार भेंट मान लेना जल्दबाजी होगी। हाल के दिनों में देश के कई राज्यों में विपक्षी दलों के सांसदों के भीतर हुई बगावत ने इस मुलाकात को संदिग्ध बना दिया है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 20 सांसदों के असंतोष से लेकर महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के पार्टी से अलग होने तक, राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि क्या ये असंतुष्ट सांसद भविष्य में एनडीए (NDA) का दामन थाम सकते हैं। चूंकि बिहार में भी राजनीतिक जमीन काफी संवेदनशील है, इसलिए राजद सांसद का उपमुख्यमंत्री से मिलना विपक्षी खेमे के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
अभय कुशवाहा का राजनीतिक बैकग्राउंड और राजद की स्थिति
राजनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान अभय कुशवाहा के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड पर भी है। राजद में शामिल होने से पहले वे एनडीए के ही घटक दल जदयू (JDU) के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं, जिसका अर्थ है कि सत्तारूढ़ गठबंधन में उनके पुराने व्यक्तिगत संबंध आज भी कायम हैं। बिहार में राजद की लोकसभा में कुल 4 सांसद हैं—पाटलिपुत्र से मीसा भारती, बक्सर से सुधाकर सिंह, औरंगाबाद से अभय कुशवाहा और जहानाबाद से सुरेंद्र प्रसाद यादव। इन चारों सांसदों के बीच अभय कुशवाहा की सक्रियता ने राजद के आंतरिक नेतृत्व के लिए भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित कर दिया है। यदि राजद के इस छोटे से सांसद समूह में भी कोई बिखराव होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर साबित हो सकता है।
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