US Iran Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक व्यापक सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है। हालिया घटनाओं में, ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। कुवैत की सेना ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, कुवैत ने इन हमलों को नाकाम करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन फिलहाल इस सैन्य हमले से हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। खाड़ी देशों में ईरान की यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका के उन हमलों का सीधा जवाब मानी जा रही है, जिनमें ईरान के कई महत्वपूर्ण बंदरगाहों और आपूर्ति प्रणालियों को तबाह कर दिया गया था।

ईरान की तीखी धमकी: बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की चेतावनी
तनाव के चरम पर होने के बीच, ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने अमेरिका को एक बेहद आक्रामक चेतावनी दी है। ‘ख़ातम-उल-अंबिया’ मध्य कमान मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों या अन्य नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाता है, तो ईरान भी पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद कर देगा। कर्नल इब्राहिम जोलफगारी ने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की किसी भी प्रकार की दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन धमकियों के जवाब में दी गई है, जिनमें उन्होंने ईरान के प्रमुख संसाधनों को निशाना बनाने का जिक्र किया था।

हमले तेज: बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर ईरान की जवाबी कार्रवाई
गुरुवार तड़के अमेरिका ने अपने आक्रामक रुख को और तेज करते हुए ईरान के उत्तरी हिस्सों पर बमबारी की और एक संदिग्ध जहाज पर गोलीबारी की, जिस पर नाकेबंदी तोड़ने का आरोप था। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलों और ड्रोन्स की बौछार कर दी। यह पहली बार है कि हिंसा का दायरा ईरान की राजधानी तेहरान के बाहरी इलाकों तक पहुँच गया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस ताजा संघर्ष में 35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति और वैश्विक चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस ताजा हिंसा ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा गलियारे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है। खाड़ी देशों के सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों से यह स्पष्ट है कि संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे मध्य-पूर्व की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। कूटनीतिक प्रयासों के अभाव में स्थिति विस्फोटक बनी हुई है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने सैन्य अड्डों को सुरक्षित करने और विरोधी को कमजोर करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
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