Sonam Wangchuk Protest : जंतर-मंतर पर केजरीवाल का हमला, धर्मेंद्र प्रधान हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाएं

Sonam Wangchuk Protest :  आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर पिछले 19 दिनों से अनशन कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का समर्थन करते हुए केजरीवाल ने केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में इस समय ‘तानाशाही’ का माहौल बना हुआ है, जहां अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और युवाओं को जेलों में डालकर उनकी आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। केजरीवाल ने सोनम वांगचुक के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि उनका यह संघर्ष केवल लद्दाख के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए है।

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परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक पर गंभीर सवाल

आईआईटी (IIT) से पढ़े हुए अरविंद केजरीवाल ने वर्तमान परीक्षा प्रणाली की बदहाली पर गहरा दुख और गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हमारे समय में परीक्षा के पेपर लीक होने जैसी घटनाएं सुनने को भी नहीं मिलती थीं, लेकिन आज यह एक ‘नियमित प्रक्रिया’ बन चुकी है। पेपर लीक होता है, फिर सरकार जांच का नाटक रचने के लिए एक कमेटी बनाती है और फिर अगले पेपर लीक की साजिश शुरू हो जाती है।” केजरीवाल ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि इस भ्रष्ट और लाचार सिस्टम के बोझ तले दबकर हाल ही में 30 मासूम छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि देश का युवा अब इस विफल व्यवस्था को और अधिक बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

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2011 के अन्ना आंदोलन की याद और सत्ता के अहंकार पर कटाक्ष

अपने संबोधन में केजरीवाल ने साल 2011 के ऐतिहासिक अन्ना आंदोलन के दिनों को ताजा किया। उन्होंने वर्तमान सरकार के रवैये की तुलना तत्कालीन कांग्रेस सरकार के घमंड से करते हुए कहा, “4 अप्रैल 2011 को इसी जंतर-मंतर पर हमने अन्ना आंदोलन शुरू किया था। उस समय की सरकार भी सत्ता के अहंकार में चूर थी और आज की सरकार भी उसी रास्ते पर चल रही है।” केजरीवाल ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते युवाओं और देश की जनता की आवाज नहीं सुनी गई, तो उन्हें इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि वे अब भी नहीं संभले, तो 3 साल बाद उनका हश्र वैसा ही होगा जैसा 2014 के चुनावों में पिछली सरकार का हुआ था।

युवा शक्ति बनाम सत्ता का संघर्ष: क्या बदलेगी सियासत?

केजरीवाल का यह भाषण सीधे तौर पर केंद्र की नीतियों को निशाने पर लेता है। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों के प्रति सरकार के कठोर रवैये को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। सोनम वांगचुक के अनशन से लेकर पेपर लीक के मुद्दे तक, केजरीवाल ने उन सभी बिंदुओं को छुआ है जो इस समय देश के युवाओं के बीच आक्रोश का कारण बने हुए हैं। उनका यह रुख यह स्पष्ट करता है कि आगामी दिनों में आम आदमी पार्टी केंद्र के खिलाफ इन मुद्दों को लेकर सड़कों पर बड़ा जन-आंदोलन खड़ा कर सकती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन तीखे आरोपों और बढ़ते जन-दबाव पर क्या रुख अपनाती है।

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Chandan Das

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