CJP Protest : दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के आमरण अनशन और छात्र आंदोलन को लगातार विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। बुधवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत भी आंदोलन के समर्थन में सामने आए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे अपने आंदोलन पर मजबूती से डटे रहें, क्योंकि किसानों का पूरा समर्थन उनके साथ है। टिकैत ने यह भी कहा कि आंदोलन को कमजोर करने और बदनाम करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन ऐसे प्रयासों से घबराने की जरूरत नहीं है।

राकेश टिकैत बोले- 20 जुलाई के कार्यक्रम में भी रहेगा पूरा सहयोग
राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित आंदोलन और कार्यक्रम के लिए भी किसान संगठन पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल ट्रैक्टर-ट्रॉलियां जंतर-मंतर पर नहीं लाई गई हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर किसान किसी भी समय आंदोलन के समर्थन में पहुंच सकते हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की। टिकैत का कहना था कि जनता की आवाज को दबाने की कोशिशें लंबे समय तक सफल नहीं हो सकतीं।

कॉकरोच जनता पार्टी पर पहले भी दे चुके हैं बयान
राकेश टिकैत ने इससे पहले मुजफ्फरनगर में हुई एक बातचीत के दौरान भी युवाओं के उभरते आंदोलनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि जिस तेजी से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ चर्चा में आई है, उससे यह स्पष्ट होता है कि देश का युवा बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और मौजूदा हालात से असंतुष्ट है। उनके अनुसार युवाओं में बढ़ती नाराजगी इस बात का संकेत है कि रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे अरविंद केजरीवाल
इसी दिन आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी सोनम वांगचुक के अनशन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने वालों की आवाज दबाई जा रही है। केजरीवाल ने कहा कि वांगचुक अपने व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं, बल्कि लद्दाख के लोगों के अधिकारों और देश के युवाओं के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शांतिपूर्ण आंदोलनों को लोकतंत्र में सम्मान मिलना चाहिए।
शिक्षकों और युवाओं की आवाज दबाने का लगाया आरोप
अपने संबोधन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहां अपनी बात रखने वाले शिक्षकों, छात्रों और बुद्धिजीवियों को परेशान किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में आवाज उठाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया है। केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को विरोध की आवाज सुननी चाहिए, न कि उसे दबाने का प्रयास करना चाहिए।
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
आईआईटी से पढ़ाई कर चुके अरविंद केजरीवाल ने देश की परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब यह लगातार सामने आने वाली समस्या बन चुकी है। उनके अनुसार हर बार पेपर लीक होने के बाद जांच समितियां बनाई जाती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। उन्होंने कहा कि इस वजह से लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
युवाओं के भविष्य को लेकर जताई चिंता
अपने संबोधन के अंत में केजरीवाल ने युवाओं की मानसिक स्थिति और बढ़ते दबाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और लगातार सामने आ रहे विवादों का असर छात्रों के मनोबल पर पड़ रहा है। उनका कहना था कि युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने भविष्य को लेकर विश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। वहीं जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन को लेकर विभिन्न संगठनों का समर्थन लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चा का विषय बन सकता है।











