Nag Panchami 2026 : 23 साल बाद सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, जानिए धार्मिक महत्व आज

Nag Panchami 2026  :  भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना हर वर्ष शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, लेकिन वर्ष 2026 का सावन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जा रहा है। इस वर्ष सावन के तीसरे सोमवार, यानी 17 अगस्त 2026 को एक ऐसा अद्भुत महासंयोग बन रहा है, जो करीब 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देखने को मिलेगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सावन सोमवार का व्रत, नाग पंचमी का पर्व और सिंह संक्रांति का त्रिवेणी संगम होगा। इससे पूर्व ऐसा दुर्लभ संयोग वर्ष 2003 में बना था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह महासंयोग भगवान शिव, नाग देवता और सूर्य देव की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी है। भक्त इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव और नाग देवता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

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सावन माह की समय-सीमा और महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन का पावन महीना 30 जुलाई 2026, गुरुवार से आरंभ होकर 28 अगस्त 2026, शुक्रवार तक चलेगा। सावन के पूरे 30 दिनों में शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस दौरान रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। सावन का प्रत्येक सोमवार श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन 17 अगस्त का दिन अपने आप में अद्वितीय है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन की गई साधना न केवल मनोकामनाओं को पूर्ण करती है, बल्कि जीवन में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जाओं को भी दूर करती है।

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नाग पंचमी 2026: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नाग पंचमी का पर्व उदया तिथि के आधार पर 17 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 4:52 बजे से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम 5:00 बजे तक रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक निर्धारित है, जो कि लगभग 2 घंटे 37 मिनट की अवधि का है। नाग पंचमी के दिन भक्त सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें और फिर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक अर्पित करें। इसके साथ ही नाग देवता की भी विधि-विधान से पूजा की जानी चाहिए। मान्यता है कि शिव के गले में सुशोभित वासुकि नाग की आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

कालसर्प और राहु-केतु दोषों से मुक्ति का अवसर

ज्योतिष शास्त्र में नाग पंचमी के दिन को राहु-केतु से संबंधित दोषों को शांत करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष, नाग दोष या ग्रह-नक्षत्रों से जुड़ी बाधाएं हैं, उनके लिए यह दिन वरदान समान है। इस शुभ महासंयोग में श्रद्धापूर्वक ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और भगवान शिव का अभिषेक करने से दोषों के प्रभाव में कमी आती है। साथ ही, इस दिन जरूरतमंदों को दान, अन्न और वस्त्र अर्पित करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। सुख-समृद्धि की प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह 17 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध होगा।

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Chandan Das

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