Work Life Balance : आज के प्रतिस्पर्धी दौर में करियर की सीढ़ियां चढ़ने की होड़ में युवा लंबे समय तक काम करने को अपनी सफलता का पैमाना मान बैठे हैं। हालांकि, यह मेहनत एक गंभीर स्वास्थ्य संकट को न्योता दे रही है। ‘एनवायरनमेंट इंटरनेशनल जर्नल’ में प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के एक संयुक्त शोध ने इस विषय पर कड़ी चेतावनी जारी की है। प्रख्यात न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने भी हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से इस अध्ययन का विश्लेषण करते हुए काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि सफलता की दौड़ में अपनी सेहत को दांव पर लगाना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है।

शोध के आंकड़े: 55 घंटे से ज्यादा काम है हृदय के लिए जोखिम
इस अध्ययन में वर्ष 2000 से 2016 के बीच दुनिया के 194 देशों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ताओं ने मुख्य रूप से उन लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया, जो प्रति सप्ताह 55 घंटे या उससे अधिक काम करते हैं। इन लोगों की तुलना उन कर्मचारियों से की गई जो सप्ताह में सामान्य 35 से 40 घंटे काम करते हैं। निष्कर्ष यह निकला कि सेहत और कार्यक्षमता के लिए सप्ताह में 35-40 घंटे का समय सबसे आदर्श है। वहीं, जो लोग साप्ताहिक 55 घंटे से अधिक समय तक काम करते हैं, उनमें कार्डियोवैस्कुलर (हृदय संबंधी) बीमारियों का जोखिम खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। वर्ष 2016 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 7.45 लाख लोगों की मौत का कारण अत्यधिक काम के कारण हुए स्ट्रोक और दिल की बीमारियां थीं।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है गहरा विपरीत प्रभाव
अत्यधिक काम केवल हृदय तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लंबे समय तक काम करने के कारण नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। शारीरिक थकान के साथ-साथ ऐसे लोगों में एंग्जायटी (घबराहट) और डिप्रेशन के मामले बढ़ रहे हैं। काम का भारी प्रेशर रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को बढ़ा सकता है, जो दीर्घकालिक रूप से घातक साबित हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अत्यधिक तनाव के कारण इंसान की उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) और एकाग्रता (कॉन्सेंट्रेशन) की क्षमता भी कम होने लगती है, जिससे काम की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
स्मार्ट वर्किंग के सुझाव: दीर्घकालिक करियर के लिए सेहत जरूरी
डॉ. सुधीर कुमार ने अपनी पोस्ट में यह स्पष्ट किया है कि उद्देश्य काम को छोड़ना नहीं, बल्कि उसे स्मार्ट तरीके से करना है। उनका सुझाव है कि यदि संभव हो, तो काम के घंटों को 35 से 40 के दायरे में सीमित रखें और किसी भी स्थिति में 55 घंटे से अधिक के कार्य का बोझ न लें। काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना, शरीर को सक्रिय रखना, 7 से 9 घंटे की गहरी नींद लेना और नियमित व्यायाम करना एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने हर सप्ताह कम से कम एक दिन पूरी तरह से रिकवरी और निजी जीवन के लिए समर्पित करने की सलाह दी है। याद रखें, एक सफल और लंबे करियर के लिए आपकी सेहत ही सबसे बड़ा और कीमती निवेश है।
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