Bihar Politics : बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सबसे चर्चित और मुखर चेहरों में शुमार पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के अत्यंत भरोसेमंद माने जाने वाले तिवारी का यह कदम आरजेडी के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उनका दर्द और आक्रोश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व और तेजस्वी यादव के इर्द-गिर्द रहने वाले सलाहकार मंडल को निशाना बनाया है।

‘तेजस्वी के इर्द-गिर्द जमा दीमक’, तिवारी ने लगाए गंभीर आरोप
इस्तीफे के बाद भावुक होते हुए मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “मैंने राजद के सभी पदों से अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। मैंने प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं को स्पष्ट बता दिया है कि अब मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ता के लिए पार्टी में सम्मान की कोई जगह नहीं बची है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव आज ऐसे लोगों से घिरे हुए हैं, जिन्होंने पार्टी को अंदर ही अंदर ‘दीमक की तरह चाटकर खोखला’ कर दिया है। तिवारी का दावा है कि कुछ स्वार्थी लोग अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पार्टी को बर्बाद करने पर तुले हैं, जिससे जमीनी स्तर के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का दम घुट रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नेतृत्व ने कोई संज्ञान नहीं लिया, जिससे अपमानित महसूस करते हुए उन्होंने यह कड़ा निर्णय लिया।

छात्र राजनीति से आरजेडी का प्रभावशाली चेहरा बनने तक का सफर
मृत्युंजय तिवारी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था, जहाँ से वे जनसरोकारों के लिए लड़ते हुए बिहार की मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हुए। उनकी आक्रामकता और वाकपटुता को देखते हुए 2014 में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी का मीडिया प्रभारी और मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया था। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से उन्होंने टीवी डिबेट और सार्वजनिक मंचों पर आरजेडी का पक्ष मजबूती से रखा। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले तिवारी पार्टी के एक अत्यंत प्रभावशाली चेहरा माने जाते थे। उनके इस अचानक इस्तीफे ने न केवल पार्टी नेतृत्व को सकते में डाल दिया है, बल्कि बिहार के सियासी समीकरणों में भी हलचल मचा दी है।
रणनीतिकार और भरोसेमंद साथी का जाना
मृत्युंजय तिवारी न केवल एक प्रवक्ता थे, बल्कि उन्हें तेजस्वी यादव का एक मजबूत रणनीतिकार और संकटमोचक भी माना जाता था। कठिन परिस्थितियों में उन्होंने हमेशा पार्टी का ढाल बनकर काम किया। अब जबकि बिहार में सियासी सरगर्मियां तेज हो रही हैं, ऐसे समय में एक अनुभवी रणनीतिकार का पार्टी छोड़ना आरजेडी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। जानकारों का मानना है कि तिवारी का जाना पार्टी के सामाजिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। आरजेडी के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे इस इस्तीफे के बाद उत्पन्न हुए वैक्यूम को कैसे भरते हैं और अपने नाराज कार्यकर्ताओं को कैसे संभालते हैं।
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