Operation Sindoor: नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शानदार सफलता पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने इस ऑपरेशन को भारतीय सेना की अदम्य वीरता और देश की “वर्ल्ड-क्लास” रक्षा तैयारियों का जीता-जागता सबूत करार दिया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि इस ऑपरेशन के माध्यम से भारत ने आतंकवादियों और उनके समर्थकों को करारा जवाब दिया है। रक्षा मंत्री ने इस सफलता का मुख्य श्रेय पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों, आधुनिकीकरण और ‘नेशन फर्स्ट, फोर्सेज फर्स्ट’ की भावना को दिया।

स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों का जलवा: आकाश और ब्रह्मोस की भूमिका
रक्षा मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने स्वदेशी तकनीक का बखूबी उपयोग किया। उन्होंने ‘आकाश तीर’ एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों की तैनाती को ऑपरेशन की सफलता का मुख्य आधार बताया। सिंह के अनुसार, यह आधुनिक तकनीक बीते 12 वर्षों में रखी गई मजबूत नींव का परिणाम है। स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के सरकार के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने बताया कि सशस्त्र बलों और डिफेंस पीएसयू (DPSU) द्वारा अब तक कई ‘पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट’ जारी की जा चुकी हैं, जिनमें हजारों रक्षा उपकरण शामिल हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही एक और सूची अधिसूचित की जाएगी ताकि आत्मनिर्भरता की गति और तेज हो सके।

रक्षा उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल: 1.78 लाख करोड़ तक पहुंचा प्रोडक्शन
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि देश का सालाना रक्षा उत्पादन वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह 2014 के मात्र 40,000 करोड़ रुपये के आंकड़ों के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। रक्षा मंत्री ने आगामी लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य इस वर्ष 2 लाख करोड़ रुपये और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के आंकड़े को पार करना है। साथ ही, भारत का रक्षा निर्यात भी 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे प्राप्त करने के प्रति उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया।
वैश्विक सुरक्षा पार्टनर के रूप में उभरता भारत
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल अपनी जरूरतों के लिए रक्षा उपकरण बनाने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक भरोसेमंद ग्लोबल सिक्योरिटी पार्टनर के रूप में स्थापित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्राओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों के साथ भारत के कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में अभूतपूर्व मजबूती आई है। ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम पर सहयोग से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने तक, ये दौरे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रतीक हैं। स्पष्ट है कि भारत अपनी सामरिक शक्ति और कूटनीति के मेल से विश्व पटल पर एक नई भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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