Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का समापन एक बेहद गहमागहमी भरे घटनाक्रम के साथ हुआ। सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस द्वारा सरकार के खिलाफ लाया गया ‘अविश्वास प्रस्ताव’ सदन में भारी बहस और हंगामे के बाद नामंजूर कर दिया गया। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच देर रात करीब 2:40 बजे तक लंबी और तीखी चर्चा चली। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि भाजपा शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने कानून-व्यवस्था के बिगड़ने, भ्रष्टाचार में वृद्धि और किसान विरोधी नीतियों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। उनके आरोपों में तानाशाही रवैये और जनहित की योजनाओं की उपेक्षा जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पलटवार: विकास को बताया सरकार की प्राथमिकता
अविश्वास प्रस्ताव के जवाब में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कड़ा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ जनकल्याण के कार्यों में जुटी है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने आदिवासी समाज को केवल ‘वोट बैंक’ के रूप में इस्तेमाल किया, जबकि भाजपा सरकार उनके सर्वांगीण विकास और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रधानमंत्री जनमन योजना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अब आदिवासी समाज जागरूक है और वह किसी के बहकावे में आने वाला नहीं है। सीएम का यह बयान आदिवासियों के बीच अपनी पैठ को और मजबूत करने के राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल का हमला: वादों से मुकरने का आरोप
सदन में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपा रही है और उपलब्धियों के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। बघेल ने विशेष रूप से किसानों की बदहाली, राशन वितरण प्रणाली में खामियों और कर्मचारियों के लंबित वेतन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादे पूरी तरह से खोखले साबित हुए हैं और आम आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। भूपेश बघेल के इन आरोपों ने विपक्ष को सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक नया आधार प्रदान किया है।
हंगामे के बीच महतारी वंदन योजना पर मंत्री की सफाई
सत्र के दौरान विवाद केवल अविश्वास प्रस्ताव तक ही सीमित नहीं रहा। गृह मंत्री विजय शर्मा के भाषण में राहुल गांधी और माओवादी हिडमा के संदर्भ को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही को कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा। वहीं, प्रश्नकाल में ‘महतारी वंदन योजना’ का मुद्दा भी छाया रहा। विधायक उमेश पटेल ने योजना के तहत लाभार्थियों के नाम काटे जाने को लेकर सवाल उठाए। इसका उत्तर देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होने, दोहरे आवेदनों, लाभार्थियों की कम उम्र और आयकर दायरे में आने जैसे तकनीकी कारणों से कुछ नाम सूची से हटाए गए हैं। स्पष्टीकरण के बाद भी सदन में इस विषय पर गरमागरम चर्चा जारी रही।











