Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चंदा चोरी के मामले और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के पुनर्गठन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने और कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि इस जटिल मामले की जांच की कमान किसी ऐसे योग्य और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए, जिसे गंभीर वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच का लंबा अनुभव हो।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा एसआईटी गठन पर सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सीधा सवाल किया कि क्या इस मामले की पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक नई विशेष जांच टीम का गठन किया जा सकता है। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार एसआईटी के पुनर्गठन पर विचार कर रही है और इस संबंध में एक विस्तृत विवरण व जानकारी आगामी सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष आधिकारिक रूप से प्रस्तुत की जाएगी।

अब तक की जांच की स्थिति और एसआईटी के निष्कर्ष
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि इस पूरे प्रकरण की शुरुआती जांच के लिए पहले ही एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया गया था। एसआईटी की शुरुआती जांच के निष्कर्षों में यह बात सामने आई कि यह एक स्पष्ट संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और वर्तमान समय में पुलिस द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है। सरकार की तरफ से मामले से जुड़ी एक अद्यतन स्थिति रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल कर दी गई है।
इस मामले में अब तक आठ आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि इस वित्तीय अनियमितता और चंदा चोरी के मामले में पुलिस अब तक कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और जांच की गति को भी काफी तेज कर दिया गया है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी स्तर पर कोई कोताही न बरती जाए, ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।
मुख्य न्यायाधीश ने सभी पक्षों को दी कड़ी चेतावनी, न दें राजनीतिक रंग
मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों और संबंधित लोगों को एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण को किसी भी कीमत पर राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह अदालत राजनीति करने का मंच नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य आपराधिक मामले की जांच का विषय है। अदालत का एकमात्र और मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस मामले की जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।
Read More : Sonam Wangchuk Case: हाईकोर्ट ने मांगी मेडिकल रिपोर्ट, सफदरजंग अस्पताल को निर्देश, कल सुनवाई












