PM Modi Gift to Putin : नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को तमिल भाषा के महान साहित्यिक ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। दोनों नेताओं की इस मुलाकात में जहां भारत-रूस संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, वहीं पुस्तक के उपहार ने सांस्कृतिक और साहित्यिक रिश्तों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया।
तिरुक्कुरल केवल साहित्य नहीं, जीवन दर्शन का महत्वपूर्ण ग्रंथ
‘तिरुक्कुरल’ को तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में शामिल किया जाता है। इसकी रचना महान कवि, दार्शनिक और संत तिरुवल्लुवर ने की थी। यह ग्रंथ जीवन के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े विचारों और नैतिक सिद्धांतों को बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करता है। यही वजह है कि सदियों बाद भी इसकी शिक्षाएं लोगों के बीच प्रासंगिक बनी हुई हैं।
133 अध्यायों में समाहित हैं 1,330 कुरल
तिरुक्कुरल में कुल 133 अध्याय हैं और इसमें 1,330 दोहे यानी कुरल शामिल हैं। इन रचनाओं में नैतिकता, शासन, धन, मित्रता, सामाजिक जिम्मेदारी, मानवीय व्यवहार और प्रेम जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं। छोटे-छोटे दोहों में गहरे जीवन मूल्यों को समेटे होने के कारण यह ग्रंथ केवल तमिल समाज तक सीमित नहीं रहा और अलग-अलग भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ।
रूस में दशकों पुराना है तिरुक्कुरल से साहित्यिक रिश्ता
भारत और रूस के बीच तिरुक्कुरल का संबंध भी काफी पुराना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 1963 में मॉस्को में जे. जे. ग्लाज़ोव और ए. कृष्णमूर्ति द्वारा इस ग्रंथ का रूसी अनुवाद प्रकाशित किया गया था। इसके बाद रूसी विद्वानों के बीच तमिल भाषा और साहित्य को लेकर रुचि बनी रही। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का पुतिन को रूसी संस्करण देना दोनों देशों के पुराने साहित्यिक जुड़ाव की याद भी दिलाता है।
पुतिन को रूसी भाषा में पुस्तक देने का खास संदेश
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किए जाने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पुस्तक रूसी पाठकों के लिए पहले से परिचित साहित्यिक परंपरा से जुड़ी है। इससे यह संदेश जाता है कि भारत और रूस के संबंध केवल राजनीतिक, रक्षा या आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद की भी मजबूत परंपरा मौजूद है।
नेतृत्व और न्याय जैसे विषयों पर केंद्रित है ग्रंथ
तिरुक्कुरल में दिए गए कई विचार आज के दौर में भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसमें बेहतर शासन, न्यायपूर्ण नेतृत्व, सामाजिक दायित्व और व्यक्तिगत आचरण को लेकर ऐसे सिद्धांत मिलते हैं, जिन्हें अलग-अलग समय और परिस्थितियों में समझा जा सकता है। इसकी यही सार्वभौमिक प्रकृति इसे किसी एक धर्म, राजनीतिक व्यवस्था या ऐतिहासिक दौर तक सीमित नहीं रहने देती।
कूटनीति में संस्कृति को महत्व देने की भारत की पहल
पुतिन को तिरुक्कुरल भेंट करने के कदम को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के एक उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी कई मौकों पर भारतीय भाषाओं, साहित्य, परंपराओं और सभ्यतागत विरासत को वैश्विक मंच पर सामने रखते रहे हैं। ऐसे में BRICS जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान तमिल साहित्य की इस महान कृति को उपहार के रूप में प्रस्तुत करना भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को भी प्रदर्शित करता है।
मोदी-पुतिन संवाद में रिश्तों का व्यापक संदेश
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक और बहुआयामी संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के साथ लोगों के बीच संपर्क भी महत्वपूर्ण है। तिरुक्कुरल का यह उपहार इसी व्यापक रिश्ते में सांस्कृतिक आयाम को सामने लाता है। मोदी और पुतिन की मुलाकात के दौरान यह संदेश भी उभरकर आया कि मजबूत द्विपक्षीय संबंध केवल सरकारी समझौतों से नहीं, बल्कि साझा सम्मान और सांस्कृतिक समझ से भी मजबूत होते हैं।
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