Sikkim Landslide : सिक्किम के नामची जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यहां नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसी) की एक निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण भूस्खलन के कारण कई कर्मचारी अंदर फंस गए हैं। जिला प्रशासन से प्राप्त शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। हादसे का शिकार हुए और बचाए गए लोगों के शवों को तुरंत राहत कार्यों के तहत सिंगटाम जिला अस्पताल, एसटीएनएम अस्पताल गंगटोक और नामची जिला अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां आगे की आवश्यक चिकित्सा और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

राहत एवं बचाव अभियान में जुटीं कई एजेंसियां
घटना की गंभीरता को देखते हुए युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, नामची जिला प्रशासन एनएचपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सिक्किम पुलिस, अग्निशमन विभाग, आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य विभाग के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल के जरिए फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इसके साथ ही, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इस पूरी स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और पल-पल की अपडेट ले रहा है।

भूस्खलन से बंद हुआ समरडुंग सुरंग का प्रवेश द्वार
यह भीषण दुर्घटना सोमवार दोपहर को हुई, जब अचानक हुए भारी भूस्खलन के कारण एक निर्माणाधीन सड़क सुरंग का प्रवेश द्वार पूरी तरह से बंद हो गया। इस आपदा की वजह से सुरंग के भीतर कम से कम 27 मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। जिला कलेक्टर अनूप तमलिंग ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि समरडुंग सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की सही संख्या की अभी भी आधिकारिक रूप से पुष्टि की जा रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या वर्तमान अनुमानों की तुलना में कम या फिर ज्यादा भी हो सकती है, इसलिए बचाव टीमों का पूरा ध्यान हर एक श्रमिक तक सुरक्षित पहुंचने पर केंद्रित है।
संदिग्ध गैस रिसाव ने बचाव कार्य को बनाया जटिल
स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस भूस्खलन ने स्थिति को और अधिक खतरनाक बना दिया है क्योंकि सुरंग के अंदर संदिग्ध गैस का रिसाव भी शुरू हो गया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस प्राकृतिक आपदा के चलते भूमिगत परतों और चट्टानों की संरचना में अचानक तीव्र हलचल हुई, जिससे यह जहरीली या हानिकारक गैस प्राकृतिक रूप से बाहर निकलने लगी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें पूरी ताकत से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं, लेकिन सुरंग के भीतर गैस की मौजूदगी ने बचाव कार्य को बेहद चुनौतीपूर्ण और जटिल कर दिया है।
गैस मास्क के साथ सुरंग में उतर रही हैं टीमें
सुरंग के भीतर फैली जहरीली गैस के कारण स्थिति इतनी विकट हो गई है कि फंसे हुए मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे कई बचाव कर्मी भी इसकी चपेट में आ गए। गैस के प्रभाव से कुछ बचाव कर्मियों को अचानक चक्कर आ गए और वे मौके पर ही बेहोश हो गए, जिन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता दी गई। प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए घटनास्थल पर एंबुलेंस की फ्लीट को पूरी तरह तैयार रखा है। वर्तमान में विशेष गैस मास्क और सुरक्षा उपकरणों से लैस प्रशिक्षित बचावकर्मी ही सुरंग के अंदर प्रवेश कर रहे हैं और सुरक्षित तरीके से मजदूरों तक पहुंचने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।
राजमार्ग परियोजना के तहत हो रहा था निर्माण
अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सुरंग किसी सामान्य मार्ग का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे एक महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा था। इस आधुनिक सड़क सुरंग के बन जाने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुचारू होने की उम्मीद थी, लेकिन प्रकृति के इस अचानक प्रकोप ने इस बड़े निर्माण कार्य को गंभीर संकट में डाल दिया है। फिलहाल पूरे इलाके में शोक और तनाव का माहौल है, जबकि प्रशासन और राहत दल हर एक फंसे हुए श्रमिक की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार अभियान को अंजाम दे रहे हैं।
Read More : Kalonji Benefits: सिर्फ मसाला नहीं, जानिए कलौंजी के संभावित स्वास्थ्य लाभ और सेवन का सही तरीका












