Viral News: इटली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इतिहास प्रेमियों और पर्यटन जगत को चौंका दिया है। एक व्यक्ति ने खुद को प्राचीन इतिहास का जानकार बताकर हजारों लोगों को वर्षों तक धोखे में रखा। उसने अपने बनाए हुए एक नकली रोमन एम्फीथिएटर को हजारों साल पुराना ऐतिहासिक स्थल बताकर पर्यटकों से प्रवेश शुल्क वसूला। उसकी कहानी इतनी विश्वसनीय लगती थी कि बड़ी संख्या में लोग इस स्थान को देखने पहुंचते रहे और इसे एक वास्तविक पुरातात्विक खोज मानते रहे। कई वर्षों तक यह धोखाधड़ी बिना किसी संदेह के चलती रही।

विचेंजा के पास बनाया गया था नकली ऐतिहासिक स्थल
रिपोर्ट के अनुसार यह मामला इटली के विचेंजा शहर के नजदीक का है। 69 वर्षीय फ्रेंको मालोसो, जो खुद को “वॉन रोजेनफ्रांज” के नाम से भी परिचित कराता था, दावा करता था कि उसने दुनिया का सबसे प्राचीन खुला रोमन एम्फीथिएटर खोज निकाला है। उसने इस जगह को ऐतिहासिक महत्व का बताते हुए लोगों के सामने कई ऐसी कहानियां पेश कीं, जिन पर पहली नजर में विश्वास करना आसान था। उसकी बातों और प्रस्तुति ने पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी प्रभावित कर दिया।

हर पर्यटक से वसूली जाती थी भारी एंट्री फीस
फ्रेंको इस तथाकथित ऐतिहासिक स्थल को देखने आने वाले प्रत्येक पर्यटक से 35 पाउंड यानी लगभग 4 हजार रुपये प्रवेश शुल्क के रूप में लेता था। वह वहां मौजूद पत्थर के स्तंभ, सीढ़ियां, मूर्तियां और कृत्रिम झील दिखाकर दावा करता था कि ये सभी चौथी शताब्दी से भी पहले की विरासत हैं। लोगों को आकर्षित करने के लिए वह रोमन सम्राट जूलियस सीजर और प्रसिद्ध प्रेम कथा के पात्र जूलियट से जुड़े किस्से भी सुनाता था। इन रोचक कहानियों के कारण पर्यटक उसकी बातों पर आसानी से विश्वास कर लेते थे।
प्रशासन भी लंबे समय तक रहा भ्रमित
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि केवल पर्यटक ही नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन भी इस दावे से प्रभावित हो गया। इस कथित ऐतिहासिक स्थल को यूरोपीय संघ की फंडिंग वाले एक पर्यटन एप्लिकेशन में भी शामिल कर लिया गया था। इससे इस स्थान की लोकप्रियता और बढ़ गई तथा अधिक संख्या में पर्यटक वहां पहुंचने लगे। लंबे समय तक किसी को भी इस पूरे मामले पर संदेह नहीं हुआ।
विशेषज्ञों की जांच में खुली सच्चाई
साल 2016 में पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसके बाद पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम ने पूरे परिसर का वैज्ञानिक परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि वहां मौजूद कोई भी संरचना प्राचीन नहीं थी। सभी खंभे, मूर्तियां और अन्य निर्माण आधुनिक सामग्री जैसे फाइबरग्लास और पेपर-माशे से तैयार किए गए थे। यहां तक कि जिस झील को ऐतिहासिक बताया जा रहा था, वह भी कृत्रिम रूप से बनाई गई थी। विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने पूरे दावे को पूरी तरह झूठा साबित कर दिया।
अदालत ने सुनाई जेल और जुर्माने की सजा
जांच पूरी होने के बाद भी फ्रेंको मालोसो अपने दावों से पीछे नहीं हटा। उसने खुद को सही साबित करने के लिए कई नई कहानियां गढ़ीं और यहां तक कि माफिया से जुड़े होने तथा कई लोगों की हत्या जैसे सनसनीखेज दावे भी किए। हालांकि अदालत ने उसके किसी भी बयान को विश्वसनीय नहीं माना। लगभग दस वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उसे दो साल चार महीने की जेल की सजा सुनाई। साथ ही 3,000 यूरो का जुर्माना लगाया गया और पूरे इलाके से सभी नकली निर्माण हटाने का आदेश भी दिया गया। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया कि ऐतिहासिक धरोहरों के नाम पर लोगों की भावनाओं और विश्वास का गलत फायदा उठाने वालों के खिलाफ कानून आखिरकार सख्त कार्रवाई करता है।











