Gaurav Gogoi Attack : लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस विधेयक को मोदी सरकार की “विफलता का स्मारक” बताते हुए कहा कि यह कानून सरकार की नीतिगत कमियों को उजागर करता है। गोगोई ने दावा किया कि केवल नया कानून लाने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

सरकार की मंशा और शिक्षा सुधार पर उठाए सवाल
बहस की शुरुआत करते हुए गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार करने के बजाय केवल नए कानूनों का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के वक्तव्य और विधेयक के प्रावधानों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार की प्राथमिकता शिक्षा प्रणाली को मजबूत करना नहीं, बल्कि केवल औपचारिक कदम उठाना है। उनके अनुसार, यदि सरकार गंभीर होती तो पहले से लागू कानूनों के प्रभाव का मूल्यांकन करती और उनकी कमियों को दूर करती।

2024 के कानून की विफलता का किया उल्लेख
कांग्रेस सांसद ने कहा कि वर्ष 2024 में भी सरकार ने इसी प्रकार का कानून लाकर दावा किया था कि पेपर लीक की घटनाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी। लेकिन उसी वर्ष नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले सामने आए और कई लोगों को आरोपी बनाया गया। उन्होंने कहा कि मामले के अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और कथित मास्टरमाइंड को भी राहत मिल गई। गोगोई ने आरोप लगाया कि इससे यह साबित होता है कि कानून के बावजूद अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
पूर्व शिक्षा मंत्री के रवैये पर भी उठाए सवाल
गोगोई ने आरोप लगाया कि जब पेपर लीक के मामले सामने आए थे, तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुरू में इन घटनाओं से इनकार किया था। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया शुरू से ही गंभीरता की कमी दर्शाता रहा है। उन्होंने संसद परिसर में भाजपा नेताओं द्वारा धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर भी तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह उनका स्वागत किया गया, उससे गलत संदेश गया और सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए था।
प्रधानमंत्री और कैबिनेट पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार को पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में धांधली और कोचिंग माफिया जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए था। उनका कहना था कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए ठोस नीतिगत फैसलों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की अपेक्षाओं को समझना सरकार की जिम्मेदारी है।
राधाकृष्णन समिति और एनटीए पर उठे सवाल
गोगोई ने सरकार से पूछा कि परीक्षा सुधारों के लिए गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए। उनका कहना था कि एजेंसी में अधिकारियों को हटाने और नियुक्तियों को लेकर सरकार के दावों में स्पष्टता नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब एनटीए के महानिदेशक को बदला गया, तब चेयरमैन को पद पर क्यों बनाए रखा गया।
शिक्षा व्यवस्था और नियुक्तियों पर लगाए आरोप
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि शिक्षा क्षेत्र में नियुक्तियों और नीतियों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा को बढ़ावा देना। उनके अनुसार, केवल जुर्माने की राशि बढ़ा देने से परीक्षा प्रणाली की खामियां दूर नहीं होंगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर मांगा जवाब
गौरव गोगोई ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और इसी कारण उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया। गोगोई ने सरकार और गृह मंत्री अमित शाह से मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों के सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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