Balaghat Tribal Issue : अभिजीत दीपके ने क्यों लिखा MP CM पद से इस्तीफा, बालाघाट कांड पर कसा तंज

अभिजीत दीपके के एक पोस्ट ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री बताते हुए इस्तीफे की घोषणा की। दरअसल, यह वास्तविक इस्तीफा नहीं बल्कि सरकार पर व्यंग्य था। बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मुद्दे पर उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए।

Balaghat Tribal Issue : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में शनिवार, 12 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके आदिवासी परिवारों से मुलाकात करने पहुंचे। इसके अगले ही दिन रविवार को उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी। दीपके ने पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तीखा तंज कसा और खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए एक कथित त्यागपत्र साझा किया।

ads
Adst

सोशल मीडिया पोस्ट में सीएम पद से इस्तीफा

अभिजीत दीपके ने अपनी पोस्ट में व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर मिला, लेकिन वह इसमें स्पष्ट रूप से असफल रहे। पोस्ट में उन्होंने मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर सरकार पर कई गंभीर सवाल भी उठाए।

Adst

आदिवासी बच्चों की मौत का मुद्दा उठाया

दीपके ने अपने कथित इस्तीफे में बालाघाट में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने लिखा कि इस घटना के बाद उनका जमीर उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने बच्चों को समय पर मेडिकल सहायता और जरूरी मदद उपलब्ध नहीं करा पाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार करने की बात कही।

मुआवजे को लेकर सरकार पर सवाल

CJP संस्थापक ने मुआवजे के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उनके मुताबिक, शुरुआत में प्रत्येक बच्चे के लिए 22 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया गया और आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद इसे बढ़ाकर 24 लाख रुपये किया गया। दीपके ने सवाल उठाया कि क्या यही रकम किसी मंत्री या विधायक के बच्चे की मौत पर भी पर्याप्त मानी जाती।

स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि बच्चों की मौत जैसी गंभीर त्रासदी के बावजूद स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना में जिम्मेदारी प्रदेश के उच्चतम स्तर तक तय होनी चाहिए। दीपके ने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए।

Adst

पीने के पानी की समस्या का किया जिक्र

दीपके ने कहा कि केंद्र सरकार की हर घर नल योजना के तहत घरों तक पानी पहुंचाने की उपलब्धियां बताई जाती हैं, लेकिन बालाघाट के कुछ आदिवासी इलाकों में परिवार आज भी पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर हैं। उनके अनुसार, इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने का खतरा बना हुआ है।

शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा

उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। दीपके का दावा है कि कई गांवों में स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने एक गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि आंगनवाड़ी से लेकर पांचवीं कक्षा तक के करीब 75 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं। उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों की मांग के बावजूद स्कूल की उचित इमारत उपलब्ध नहीं कराई गई।

बीजेपी सरकार के 21 साल पर निशाना

CJP संस्थापक ने अपनी पोस्ट में मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार के लंबे कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 2003 से बीजेपी सरकार के लगभग 21 साल के कार्यकाल के बावजूद कई आदिवासी परिवारों को सुरक्षित पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।

आदिवासी परिवारों के आंकड़ों का किया उल्लेख

दीपके ने बिजली, अपराध और कुपोषण से जुड़े आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश में 55,795 आदिवासी परिवारों के घरों में बिजली नहीं है। साथ ही NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत बताई। उन्होंने राज्य में 5.41 लाख से अधिक बच्चों के कम वजन की समस्या का भी उल्लेख किया।

कुपोषण को लेकर भी उठाए गंभीर सवाल

दीपके ने विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में 1.36 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित पाए गए हैं और आदिवासी समुदाय के बच्चे इससे विशेष रूप से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बीच वह आदिवासी समुदाय की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए हैं।

व्यंग्य के जरिए मोहन यादव पर निशाना

अपनी पोस्ट के अंत में अभिजीत दीपके ने कहा कि बालाघाट समेत पूरे मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों और बच्चों की मौत के बाद उनके पास मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं बचता। हालांकि, उनका यह कथित इस्तीफा वास्तव में राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीजेपी सरकार पर निशाना साधने के लिए साझा किया गया है।

Read More : Surguja Hemp Smuggling : सरगुजा में तस्करों का फिल्मी खेल खत्म, पुलिस ने खेत से दो आरोपियों को दबोचा 

Adst
Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • झारखंड
    • राजस्थान
    • ओडिशा

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.

Adst