CJP Protest: नीट पेपर लीक मामले को लेकर लंबे समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय युवाओं के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाता है तो उनकी पार्टी ऐसे हर फैसले का स्वागत करती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के निर्देशों के साथ-साथ सरकार को आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा।

आंदोलन समाप्त, लेकिन मांगें अब भी बरकरार
जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन सरकार और CJP के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति बनने के बाद समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद पार्टी का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मांगें अभी अधूरी हैं। खासकर विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन के दौरान छात्रों और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का मुद्दा अब भी प्रमुख बना हुआ है। सौरभ दास ने कहा कि आंदोलन समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार अपनी बाकी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई है।

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग
सौरभ दास ने कहा कि CJP की सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी एफआईआर बिना किसी शर्त के वापस ली जाएं। इसके साथ ही सरकार लिखित रूप में यह भरोसा दे कि भविष्य में किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
लिखित आश्वासन और रिहाई पर दिया अल्टीमेटम
पार्टी प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि मंगलवार तक सरकार अपनी ओर से लिखित गारंटी जारी करेगी। इसके अलावा आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को बिना देरी के रिहा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती है तो CJP दिल्ली में एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। पार्टी का कहना है कि उसकी मूल मांगें पूरी होने के बाद ही अन्य प्रक्रियाओं पर आगे बढ़ा जा सकता है।
सरकार से बिना शर्त लिखित गारंटी की मांग
CJP ने सरकार से साफ और बिना किसी शर्त के लिखित आश्वासन की मांग दोहराई है। पार्टी के अनुसार, इस आश्वासन में तीन प्रमुख बिंदु शामिल होने चाहिए—सभी एफआईआर की वापसी, भविष्य में किसी भी प्रकार की जवाबी कार्रवाई नहीं करने की गारंटी और हिरासत में लिए गए सभी लोगों की तत्काल रिहाई। सौरभ दास ने कहा कि यदि इन बिंदुओं पर अमल नहीं हुआ तो पार्टी दोबारा राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन तेज करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच को लेकर अपनाया सख्त रुख
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि मामले की गहराई से जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि कानून अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए और जांच पूरी निष्पक्षता के साथ होनी चाहिए।
पुलिस पर हमलों और डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा के दौरान घायल हुए करीब 250 पुलिसकर्मियों के मामले का भी संज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि पुलिस पर हमले वास्तव में छात्र प्रदर्शनकारियों ने किए थे या फिर कुछ असामाजिक तत्वों ने स्थिति का फायदा उठाया। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं ताकि जांच के दौरान तथ्यों से कोई छेड़छाड़ न हो सके।
नाबालिग छात्रों को राहत, सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन छात्र प्रदर्शनकारियों की आयु 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि सरकार CJP की मांगों पर समय रहते फैसला लेती है तो विवाद पूरी तरह समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि वादे पूरे नहीं किए गए तो राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बड़े विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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