Akhilesh Yadav Attack: एंटी पेपर लीक बिल पर अखिलेश यादव का तंज, बोले- प्रधान हटे, प्रधानमंत्री बच गए

लोकसभा में ‘एंटी पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जो चढ़ावा चोरी नहीं रोक पाए, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे?” साथ ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।

Akhilesh Yadav Attack: लोकसभा में मंगलवार को ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी ने इस विधेयक को छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता बताया, जबकि विपक्ष ने इसे सरकार की नीतिगत विफलताओं को छिपाने का प्रयास करार दिया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने बहस में हिस्सा लेते हुए सरकार की शिक्षा नीति, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक की घटनाओं पर कई सवाल उठाए।

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कानून की प्रभावशीलता पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने कहा कि यदि पहले से लागू कानून प्रभावी होता, तो पिछले वर्षों में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने नहीं आतीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग छोटी-छोटी अनियमितताओं को रोकने में सफल नहीं हुए, वे देशभर में होने वाले पेपर लीक को कैसे रोक पाएंगे। उनके अनुसार सरकार मौजूदा कानून में केवल संशोधन कर रही है, लेकिन परीक्षा प्रणाली की मूल समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर रही है।

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शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था को एक विशेष दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है और उच्च शिक्षा संस्थानों में भी कई कमियां मौजूद हैं। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर देना होना चाहिए, लेकिन सरकार की नीतियों से गरीब, दलित और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है।

प्राथमिक स्कूलों और गरीब छात्रों का मुद्दा

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं। यदि ऐसे स्कूल बंद होंगे या उनकी गुणवत्ता प्रभावित होगी तो सबसे अधिक नुकसान गरीब परिवारों के बच्चों को होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने के बजाय ऐसी नीतियां अपना रही है, जिनसे सामाजिक असमानता और बढ़ सकती है।

छात्र आंदोलन और सरकार के रुख का किया जिक्र

सपा सांसद ने कहा कि नीट परीक्षा और पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर के लाखों युवाओं ने आवाज उठाई। उनके अनुसार सरकार ने अंततः छात्रों की मांगों को स्वीकार किया और बातचीत का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि जब लोकतांत्रिक तरीके से युवा अपनी बात रखते हैं तो सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के आंदोलन ने यह साबित किया कि लोकतंत्र में जनभागीदारी महत्वपूर्ण होती है।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर ली चुटकी

अखिलेश यादव ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी उल्लेख किया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि एक मंत्री के इस्तीफे से सरकार ने अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय छात्रों से किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना चाहिए ताकि युवाओं का भरोसा बहाल हो सके।

पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर चिंता

नीट परीक्षा का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस मामले से लाखों छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की पूरी प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता का प्रश्न है। उनके अनुसार यदि लगातार पेपर लीक होते रहेंगे तो मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास व्यवस्था से उठ जाएगा और इसका असर देश के भविष्य पर भी पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश और एनटीए को लेकर भी उठाए मुद्दे

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने राज्य में शिक्षा संस्थानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति का भी उल्लेख किया और कहा कि परीक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

विश्वविद्यालयों और शिक्षा नीति पर जताई चिंता

अपने संबोधन के अंत में अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक विवादों से दूर रखते हुए उनके विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी करने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए केवल कानून में संशोधन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि व्यापक और प्रभावी सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

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