Suneil Anand Death: हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का निधन हो गया है। करीब 70 वर्ष की उम्र में उन्होंने लंदन में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि परिवार की ओर से की गई है। इस खबर के सामने आने के बाद फिल्म जगत और देव आनंद के प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार ने इस कठिन समय में लोगों से संवेदनाएं व्यक्त करने के साथ-साथ उनकी निजता का सम्मान करने की अपील भी की है।

परिवार ने आधिकारिक बयान जारी किया
सुनील आनंद के निधन की जानकारी उनकी भांजी गिनी नारंग ने आधिकारिक बयान जारी कर दी। उन्होंने कहा कि पूरे परिवार के लिए यह बेहद दुखद क्षण है। बयान में परिवार ने उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने इस कठिन समय में अपनी संवेदनाएं और शुभकामनाएं भेजीं। साथ ही परिवार ने अनुरोध किया कि इस दुख की घड़ी में उनकी निजी भावनाओं और पारिवारिक गोपनीयता का सम्मान किया जाए।

हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुनील आनंद को दिल का दौरा पड़ने के बाद लंदन के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और 28 जुलाई की सुबह उनका निधन हो गया। उल्लेखनीय है कि इसी अस्पताल में वर्ष 2011 में उनके पिता और दिग्गज अभिनेता देव आनंद ने भी अंतिम सांस ली थी। इस संयोग ने परिवार और प्रशंसकों की भावनाओं को और अधिक भावुक कर दिया।
फिल्मों में उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला मुकाम
फिल्मी परिवार से होने के बावजूद सुनील आनंद का करियर बॉलीवुड में वह सफलता हासिल नहीं कर पाया, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती थी। जहां अधिकांश बड़े सितारे अपने बच्चों को भव्य अंदाज में लॉन्च करते हैं, वहीं देव आनंद ने अपने बेटे को अभिनय की दुनिया में अपेक्षाकृत साधारण तरीके से अवसर दिया। इसके बावजूद सुनील अपनी अलग पहचान बनाने में संघर्ष करते रहे।
‘आनंद और आनंद’ से हुई फिल्मी शुरुआत
सुनील आनंद ने वर्ष 1984 में फिल्म ‘आनंद और आनंद’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म का निर्देशन स्वयं देव आनंद ने किया था। फिल्म में देव आनंद मुख्य भूमिका में थे, जबकि राखी और स्मिता पाटिल जैसी दिग्गज अभिनेत्रियां भी इसका हिस्सा थीं। सुनील ने इसमें सहायक भूमिका निभाई थी। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और उनकी शुरुआत प्रभावशाली नहीं रही।
लीड एक्टर के रूप में भी नहीं मिली सफलता
पहली फिल्म के बाद सुनील आनंद को मुख्य अभिनेता के तौर पर भी कई अवसर मिले। उन्होंने ‘कार थीफ’ में मुख्य भूमिका निभाई, जिसमें उनके साथ विजयता पंडित नजर आई थीं। हालांकि यह फिल्म भी दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकी। इसके बाद उन्होंने ‘मैं तेरे लिए’ सहित कुछ अन्य फिल्मों में भी काम किया, लेकिन कोई भी फिल्म उनके करियर को नई दिशा नहीं दे सकी। लगातार असफलताओं के कारण उनका फिल्मी सफर अपेक्षित ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाया।
कमबैक की कोशिश भी रही नाकाम
कई वर्षों के अंतराल के बाद सुनील आनंद ने वर्ष 2001 में ‘मास्टर’ फिल्म के जरिए वापसी की कोशिश की। इस फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने स्वयं किया था। मार्शल आर्ट्स पर आधारित इस फिल्म से उन्हें नई शुरुआत की उम्मीद थी, लेकिन यह भी बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने अभिनय से लगभग दूरी बना ली और पर्दे पर उनकी मौजूदगी बहुत कम देखने को मिली।
नवकेतन फिल्म्स की संभाली जिम्मेदारी
बताया जाता है कि वर्ष 2011 में देव आनंद के निधन तक सुनील आनंद अपने पिता के साथ उनके प्रतिष्ठित बैनर नवकेतन फिल्म्स में सहायक निर्देशक के रूप में काम करते रहे। पिता के निधन के बाद उन्होंने प्रोडक्शन हाउस की जिम्मेदारी संभाली और इसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया। हालांकि, उन्हें इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता नहीं मिल सकी।
परिवार में शोक का माहौल
सुनील आनंद अपने पीछे परिवार की यादें छोड़ गए हैं। उनकी मां और देव आनंद की पत्नी, वरिष्ठ अभिनेत्री कल्पना कार्तिक वर्तमान में अपनी बेटी के साथ ऊटी में रहती हैं। 94 वर्षीय कल्पना कार्तिक के लिए यह व्यक्तिगत रूप से बेहद दुखद क्षण है। सुनील आनंद के निधन के साथ ही भारतीय सिनेमा के एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार का एक और अहम अध्याय हमेशा के लिए इतिहास का हिस्सा बन गया।
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