Parliament Row: लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान बुधवार को सदन का माहौल उस समय काफी गर्म हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने अपने भाषण में ‘स्टूडेंट’, ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसे असंसदीय भाषा बताते हुए सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। बिल पर चर्चा के बीच दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

राहुल गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष की आपत्ति
राहुल गांधी के भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए शब्दों पर भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने कड़ी नाराजगी जताई। सत्ता पक्ष का कहना था कि इस तरह की शब्दावली देश के युवाओं और आम नागरिकों के सम्मान के खिलाफ है। भाजपा सांसदों ने इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत बताते हुए कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर इस प्रकार की भाषा का प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। विरोध के चलते सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ और अध्यक्ष को व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर साधा निशाना
हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एंटी पेपर लीक जैसे गंभीर और युवाओं के भविष्य से जुड़े विधेयक पर रचनात्मक चर्चा और सुझाव देने के बजाय विपक्ष केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, संसद में विधेयकों पर तथ्य आधारित चर्चा होनी चाहिए, ताकि कानून और अधिक प्रभावी बन सके।
संसदीय मर्यादा पर उठाए सवाल
अपने संबोधन में जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी की भाषा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है और जनप्रतिनिधियों से मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के भविष्य माने जाने वाले युवाओं के संदर्भ में किसी भी प्रकार की अपमानजनक टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री ने संसद की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
21 जुलाई की घटना का भी किया उल्लेख
चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने 21 जुलाई की एक घटना का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उस दिन नेता प्रतिपक्ष प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठे थे और इस घटनाक्रम को लेकर उन्होंने तंज भी कसा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा और आचरण का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके इस बयान पर विपक्षी सांसदों ने भी प्रतिक्रिया दी, जिससे सदन में बहस और तेज हो गई।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सरकार का पक्ष
विधेयक पर चर्चा के दौरान छात्रों के प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई का मुद्दा भी उठा। इस पर सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। सरकार का कहना था कि इस मामले में गोली चलाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए ऐसे आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
गोली चलाने के आदेश को लेकर दिया कानूनी स्पष्टीकरण
जितेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी परिस्थिति में गोली चलाने का निर्णय लेना पड़े, तो उसका अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं होता। उन्होंने कहा कि ऐसे आदेश संबंधित मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए किसी मंत्री पर इस प्रकार के आदेश देने का आरोप लगाना तथ्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि संवेदनशील विषयों पर बिना प्रमाण के आरोप लगाने से बचना चाहिए।
युवाओं के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर हुई बहस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि युवाओं, परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद गहरे हैं। सरकार का कहना है कि नया कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगा, जबकि विपक्ष परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहा है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह विधेयक संसद की सबसे चर्चित बहसों में शामिल रहा और इसने शिक्षा तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया।
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