Bhopal Farmers Protest: MSP पर अड़े किसान, पुलिस से झड़प के बाद वार्ता भी बेनतीजा

Bhopal Farmers Protest: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर शत-प्रतिशत मूंग खरीद समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बड़ी संख्या में किसान राजधानी पहुंचकर सरकार से अपनी मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग कर रहे हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन और उग्र हो गया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

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पहले दौर की वार्ता रही विफल

मंगलवार रात सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन किसी ठोस निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। इसके बावजूद किसान संतुष्ट नहीं हुए और पूरी रात सड़कों पर डटे रहे। किसानों ने साफ कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को ठोस निर्णय लेना होगा।

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मुख्यमंत्री ने बनाई चार सदस्यीय समिति

बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आंदोलनरत किसानों से संवाद स्थापित करने के लिए चार सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में है और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहती है। उन्होंने बताया कि कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना पहले भी किसानों से बातचीत कर चुके हैं और अब उनके साथ मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, राकेश सिंह तथा अन्य अधिकारी भी चर्चा करेंगे। सरकार का उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि सहमति के आधार पर समाधान निकालना है।

किसानों और पुलिस के बीच हुई झड़प

प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारी किसानों ने बैरिकेड्स हटाने की कोशिश की और कुछ लोग एक बस पर भी चढ़ गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।

मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे किसान

आंदोलनकारी किसानों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा की थी। इसी के तहत हजारों किसान नर्मदापुरम रोड स्थित वीर सावरकर सेतु की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाए गए और अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार किसानों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की।

यातायात और स्कूलों पर पड़ा असर

किसानों के प्रदर्शन का असर राजधानी की यातायात व्यवस्था पर भी देखने को मिला। नर्मदापुरम रोड पर लंबे समय तक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हुई। पुलिस ने लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने आसपास के कुछ स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

केंद्र सरकार को लिखा गया पत्र

कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का अधिकतम लाभ मिलना चाहिए। राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र द्वारा निर्धारित मौजूदा खरीद लक्ष्य के कारण सभी किसानों की उपज एमएसपी पर खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिए लक्ष्य बढ़ाना आवश्यक है ताकि अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।

सरकार ने बातचीत से समाधान की जताई उम्मीद

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य में किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है और सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसान संगठन और सरकार मिलकर बातचीत के माध्यम से किसी सकारात्मक समाधान तक पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हमेशा किसानों के हितों के साथ खड़ी रही है, लेकिन यह भी जरूरी है कि आंदोलन के कारण आम लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किसान आंदोलन को भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों के बढ़ते असंतोष का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को उन्हें गंभीरता से सुनना चाहिए। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें टालने का प्रयास कर रही है।

किसानों की मांगों पर सियासत तेज

कांग्रेस ने कहा कि किसान शत-प्रतिशत मूंग खरीद, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों के हितों की सुरक्षा और केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि ये राजनीतिक नहीं बल्कि किसानों के जीवन और आजीविका से जुड़े बुनियादी मुद्दे हैं। कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन को समर्थन देते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों की अनदेखी की, तो प्रदेशभर में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन समाधान निकलने तक आंदोलन जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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Chandan Das

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