Anti Paper Leak Bill: लोकसभा से पारित होने के बाद लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 अब गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। उच्च सदन में इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सांसद परीक्षा प्रणाली, छात्रों के भविष्य और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर एक-दूसरे पर राजनीतिक हमले कर सकते हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर हुआ था हंगामा
बुधवार को लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ। सत्तापक्ष ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की। लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले लगभग 40 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी और बाद में दोबारा भी कार्यवाही बाधित रही।

‘एलओपी को बोलने दो’ के नारों से गूंजा सदन
जब दोपहर तीन बजे लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो कांग्रेस सांसदों ने “एलओपी को बोलने दो” के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष का आरोप था कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ाने की मांग की। इस दौरान सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा।
जितेंद्र सिंह ने दिया सरकार का पक्ष
हंगामे के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। उनके जवाब के बाद लोकसभा ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके बाद भी कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी जारी रही और अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
नीट पेपर लीक मामले का भी किया जिक्र
जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और 12 जुलाई को जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। उन्होंने बताया कि आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और मामले की सुनवाई भी शुरू हो गई है। सरकार का दावा है कि नए संशोधन कानून के लागू होने के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में होगी और पांच महीने के भीतर फैसला आने का लक्ष्य रखा गया है।
कांग्रेस नेताओं के दावों पर सरकार का पलटवार
चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर भी केंद्रीय मंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सरकार ने संयम बरता और किसी भी तरह की जनहानि नहीं होने दी। वहीं, प्रियंका गांधी द्वारा पिछले कुछ वर्षों में 152 पेपर लीक और करोड़ों छात्रों के प्रभावित होने के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि ये आंकड़े किस आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।
52 एफआईआर दर्ज होने का दावा
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि 2024 में लागू कानून के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने का विपक्ष का आरोप सही नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मामलों में अब तक 52 प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई कर रही है और शिक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधार लागू किए जा रहे हैं।
विधेयक में सख्त सजा का प्रावधान
संशोधन विधेयक के तहत परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले दोषियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और नकल माफिया पर प्रभावी रोक लगाना है।
संगठित अपराधों पर और कड़े होंगे प्रावधान
विधेयक में संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों के खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की कैद और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करने और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इन अदालतों को आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य दिया जाएगा, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।
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