US Fed Rate Decision: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति बैठक में लगातार दूसरी बार ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया है। हालांकि इस बार लिया गया निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से नहीं था। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के 12 सदस्यों में से 9 ने ब्याज दरों को यथावत रखने का समर्थन किया, जबकि 3 सदस्यों ने 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया। यह कई वर्षों बाद ऐसा मौका है जब फेड की नीति बैठक में इतने बड़े स्तर पर मतभेद देखने को मिले हैं।

2016 के बाद पहली बार दिखा इतना बड़ा मतभेद
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर इस तरह की असहमति वर्ष 2016 के बाद पहली बार सामने आई है। आमतौर पर ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसलों में समिति के सदस्य एकमत दिखाई देते हैं, लेकिन इस बार आर्थिक परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और महंगाई को लेकर नीति निर्माताओं के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।

महंगाई बनी असहमति की सबसे बड़ी वजह
दरों में बढ़ोतरी का समर्थन करने वाले अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका में महंगाई अभी भी फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। उनका तर्क है कि यदि इस समय सख्ती नहीं बरती गई तो महंगाई दोबारा तेज हो सकती है और भविष्य में उसे नियंत्रित करना अधिक कठिन हो जाएगा। दूसरी ओर, बहुमत का मानना है कि ब्याज दरों में किसी नए बदलाव से पहले महंगाई, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आगामी आंकड़ों का इंतजार करना अधिक उचित होगा।
किन अधिकारियों ने बढ़ोतरी का किया समर्थन
ब्याज दरों में वृद्धि के पक्ष में मतदान करने वालों में क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हमैक, मिनियापोलिस फेड के अध्यक्ष नील काशकारी और डलास फेड की प्रतिनिधि लॉरी लोगन शामिल रहे। इन तीनों अधिकारियों को लंबे समय से महंगाई के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले नीति निर्माताओं के रूप में देखा जाता है। उनका मानना है कि कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए मौद्रिक नीति को अभी भी कड़ा रखना आवश्यक है।
फेड चेयर ने असहमति को बताया सामान्य प्रक्रिया
फेड चेयर केविन वार्श ने बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के भीतर हुए मतभेद को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उनके अनुसार, मतभेद केवल इस बात को लेकर है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सही समय और उपयुक्त रणनीति क्या होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान सभी पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई और हर सदस्य ने अपने आर्थिक आकलन के आधार पर राय रखी।
महंगाई पर अभी भी बनी हुई है चिंता
फेड चेयर ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल के महीनों में महंगाई की रफ्तार जरूर कुछ धीमी हुई है, लेकिन इसे पूरी तरह नियंत्रित नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि कई वर्षों तक लक्ष्य से ऊपर बनी रही महंगाई को केवल एक-दो महीनों के बेहतर आंकड़ों के आधार पर समाप्त नहीं माना जा सकता। यदि आने वाले समय में आर्थिक परिस्थितियां इसकी मांग करेंगी तो फेड आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
तेल की कीमतों से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव भी अमेरिकी महंगाई के लिए चुनौती बना हुआ है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। यदि तेल महंगा होता है तो परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि फेड के कई अधिकारी अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
आगे के आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी नजर
फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई भी फैसला आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिया जाएगा। महंगाई, रोजगार बाजार और आर्थिक विकास की गति पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि महंगाई में अपेक्षित गिरावट नहीं आती या आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं तो केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव करने से परहेज नहीं करेगा। फिलहाल फेड का रुख सतर्क बना हुआ है और बाजार की नजर अब अगली नीति बैठक तथा नए आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेगी।
Read More : Kedarnath Landslide: गौरीकुंड के आगे भूस्खलन, केदारनाथ यात्रा मार्ग बंद












