TMC Symbol Row: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संस्थापक-अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग (EC) से जल्द फैसला सुनाने की अपील की है। ममता बनर्जी ने आयोग से कहा है कि इस मामले की जांच प्रक्रिया को अब बिना किसी देरी के पूरा किया जाए।

ममता का कहना है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला विरोधी गुट कई बार समय दिए जाने के बावजूद अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाया है। ऐसे में उन्हें और अतिरिक्त समय नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग को भेजे पत्र में कहा कि यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है, इसलिए इसका समाधान जल्द होना जरूरी है।

TMC के असली दावेदार को लेकर चल रही है लड़ाई
यह पूरा विवाद इस बात को लेकर है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के असली प्रतिनिधि के रूप में किस गुट को मान्यता मिलेगी। चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह तय होगा कि पार्टी का चुनाव चिह्न, संगठनात्मक पहचान, संपत्तियों और राजनीतिक फंड पर नियंत्रण किसके पास रहेगा।मौजूदा समय में यह राजनीतिक संघर्ष ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के बीच चल रहा है। दोनों पक्ष पार्टी पर अपना अधिकार होने का दावा कर रहे हैं।
ममता गुट ने समय पर दाखिल किया जवाब
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहाल को लिखे पत्र में बताया कि उनके गुट ने आयोग के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया है। उन्होंने कहा कि 2 जुलाई को जारी आयोग के निर्देश के बाद उनके पक्ष ने तय समय सीमा यानी 6 जुलाई तक अपना विस्तृत जवाब जमा कर दिया था।ममता ने यह भी कहा कि उनके जवाब की एक प्रति उसी समय विपक्षी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को ईमेल और स्पीड पोस्ट के जरिए भेज दी गई थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी तरफ से प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं की गई।
ऋतब्रत गुट पर जवाब नहीं देने का आरोप
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि विरोधी गुट लगातार समय बढ़ाने की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक उसने अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा दिए गए समय विस्तार का भी उल्लेख किया।ममता के अनुसार, चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को ऋतब्रत बनर्जी को भी 6 जुलाई तक जवाब देने का निर्देश दिया था। इसके बाद 7 जुलाई को समय सीमा बढ़ाकर 10 जुलाई कर दी गई। फिर ऋतब्रत गुट की 15 दिन अतिरिक्त समय की मांग पर आयोग ने 13 जुलाई के पत्र के जरिए उन्हें 25 जुलाई तक का अवसर दिया।
जवाब नहीं मिलने पर ममता ने उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने कहा कि 25 जुलाई 2026 की समय सीमा खत्म होने के बाद भी उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि ऋतब्रत बनर्जी गुट ने अपना जवाब दाखिल किया है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि जवाब जमा किया गया होता तो उसकी प्रति उनके पक्ष को भी उपलब्ध कराई जाती।उन्होंने दावा किया कि इससे यह संकेत मिलता है कि विरोधी गुट ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। ममता का कहना है कि जवाब दाखिल नहीं करने का अर्थ है कि विरोधी पक्ष उनके गुट द्वारा पेश किए गए तथ्यों और दावों का विरोध करने की स्थिति में नहीं है।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने की जताई आशंका
ममता बनर्जी ने विरोधी गुट को बार-बार मिल रहे समय विस्तार पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिरिक्त समय का इस्तेमाल नए दस्तावेज या कथित रूप से मनगढ़ंत सबूत तैयार करने के लिए किया जा सकता है।उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि ऋतब्रत गुट ने 22 जून को आयोग के सामने जो शुरुआती दावे और तथ्य रखे थे, वह अब बाद में उनके बाहर जाकर कोई नया मामला पेश नहीं कर सकता।
TMC विवाद के फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें
तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहा यह विवाद आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। चुनाव आयोग का फैसला यह तय करेगा कि पार्टी की आधिकारिक पहचान और चुनावी अधिकार किस गुट के पास रहेंगे।अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई और अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। ममता बनर्जी गुट लगातार जल्द फैसले की मांग कर रहा है, जबकि विरोधी पक्ष की ओर से जवाब और आगे की रणनीति का इंतजार है।











