Supreme Court On Pellet Gun : सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने केंद्र से पूछा है कि भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) क्या है और किन परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियां इसका प्रयोग कर सकती हैं। यह मामला रिटायर्ड इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आज़ाद और प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए दो पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार से पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों, दिशा-निर्देशों और सुरक्षा मानकों की जानकारी मांगी है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर क्या स्पष्ट SOP मौजूद है और उसका पालन किस तरह किया जाता है।याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पैलेट गन का इस्तेमाल करना उचित नहीं है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

याचिका में पैलेट गन पर रोक लगाने की मांग
याचिका में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने यानी इसे डीकमीशन करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए इस तरह के हथियारों का प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।याचिका में कहा गया है कि पैलेट गन से गंभीर चोटें लग सकती हैं और कई मामलों में लोगों की आंखों की रोशनी तक प्रभावित हो सकती है। ऐसे में इसके इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बनाए जाने की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन को कहा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका में संशोधन करें। अदालत ने संकेत दिया कि मामले को व्यापक रूप से देखने की जरूरत है और केवल प्रतिबंध की मांग के बजाय इसके इस्तेमाल की प्रक्रिया, नियम और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वर्तमान में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर क्या व्यवस्था लागू है और सुरक्षा बल किन परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल लोगों ने लगाई गुहार
गौरतलब है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कुछ लोग पैलेट गन से घायल हुए थे। इसके बाद पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में घायल लोगों को मुआवजा देने और उनके इलाज की उचित व्यवस्था कराने की मांग भी की गई है।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर उठे संवैधानिक सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि शांतिपूर्ण भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। इसमें कहा गया है कि किसी भी कार्रवाई में बल का इस्तेमाल जरूरत और परिस्थिति के अनुरूप होना चाहिए।याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके और सुरक्षा बलों के पास भीड़ नियंत्रण के लिए सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हों।
अब केंद्र के जवाब पर रहेगी सुप्रीम कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब केंद्र सरकार को पैलेट गन के इस्तेमाल की SOP और इससे जुड़े नियमों पर अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार के जवाब के आधार पर अदालत आगे की दिशा तय कर सकती है।यह मामला देश में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों, नागरिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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