Anti Paper Leak Bill : राज्यसभा में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया, जिस पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए सात घंटे का समय निर्धारित किया गया। इस दौरान विभिन्न दलों के सांसदों ने अपने-अपने विचार रखे। चर्चा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और प्रभावी कानून लाने में काफी देरी की, जिससे लाखों छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

परीक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देशभर में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों ने छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित किया है। उनके अनुसार, विपक्ष लंबे समय से सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को उठाता रहा, लेकिन सरकार ने समय रहते कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता। खरगे ने सरकार से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की मांग दोहराई।

कानून लाने में देरी का लगाया आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि सरकार ने इस विषय पर गंभीर पहल करने में लगभग दो वर्ष का समय लगा दिया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी विपक्ष ने पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों का मुद्दा उठाया था, लेकिन उस समय सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। खरगे ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार युवाओं और परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवाल उठाते रहे, लेकिन सरकार ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। उनके अनुसार, अब लाया गया संशोधन सरकार की पहले की कमियों को स्वीकार करने जैसा है।
छात्रों के संघर्ष का किया उल्लेख
अपने संबोधन में खरगे ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में छात्रों ने लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई और कई स्थानों पर प्रदर्शन किए। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के संघर्ष का असर सरकार पर पड़ा और उसे अपनी नीतियों में बदलाव करना पड़ा। खरगे ने कहा कि सरकार ने यह कदम छात्रों की समस्याओं को समझने के बजाय राजनीतिक दबाव और अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों का आंदोलन इतना व्यापक नहीं होता, तो शायद यह संशोधन भी नहीं लाया जाता।
प्रधानमंत्री और सरकार पर राजनीतिक टिप्पणी
मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह कानून छात्रों के हितों से अधिक अपनी राजनीतिक स्थिति को बचाने के उद्देश्य से पेश किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह महसूस हो गया था कि यदि युवाओं की नाराजगी बढ़ती रही, तो इसका राजनीतिक असर पड़ सकता है। इसी कारण सरकार ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों में बदलाव किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और लोकतंत्र में सरकार को जनता की चिंताओं का जवाब देना ही पड़ता है।
बयान के बाद सदन में हुआ हंगामा
अपने भाषण के दौरान खरगे ने 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और इस पूरे मामले पर सरकार को देश के सामने जवाब देना चाहिए। इन टिप्पणियों के बाद राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। सदन के नेता जेपी नड्डा ने खरगे के भाषण में कथित असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए उन्हें कार्यवाही से हटाने की मांग की।
हालांकि, खरगे ने कहा कि उन्होंने किसी भी असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं किया है और उनका आशय केवल यह था कि सरकार को 20 जुलाई की घटनाओं पर देश की जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। इसके बाद कुछ समय तक सदन में हंगामा जारी रहा और एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आगे बढ़ती रही।
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