Omar Abdullah Divorce: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई कि दोनों ने तलाक के लिए सहमति बना ली है और अब वे अपने वैवाहिक विवाद को कानूनी रूप से समाप्त करना चाहते हैं। इस घटनाक्रम के बाद मामला अंतिम निपटारे की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को दी महत्वपूर्ण जानकारी
सुप्रीम कोर्ट में उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया है। सिब्बल ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच सभी विवादों का समाधान हो चुका है और आवश्यक सहमति बन गई है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए तलाक को मंजूरी प्रदान की जाए।

साल 2009 से अलग रह रहे हैं दोनों
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला पिछले कई वर्षों से अलग रह रहे हैं। उमर अब्दुल्ला के अनुसार, वर्ष 2009 से दोनों का वैवाहिक जीवन व्यावहारिक रूप से समाप्त हो चुका था और तब से वे अलग-अलग रह रहे हैं। लंबे समय तक अलग रहने और संबंधों में सुधार की संभावना समाप्त होने के कारण दोनों ने अब आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का निर्णय लिया है।
अनुच्छेद 142 के तहत मांगी गई राहत
कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले में अनुच्छेद 142 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च अदालत को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है। इसी प्रावधान के तहत अदालत विशेष परिस्थितियों में ऐसा आदेश पारित कर सकती है, जिससे विवाद का अंतिम और प्रभावी समाधान हो सके। सिब्बल ने कहा कि दोनों पक्ष अब विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और अदालत इस आधार पर तलाक को मंजूरी दे सकती है।
शादी पूरी तरह टूट चुकी है: उमर अब्दुल्ला
उमर अब्दुल्ला ने अपनी याचिका में कहा था कि उनका वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुका है और इसे दोबारा सामान्य बनाना संभव नहीं है। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि विवाह का मूल उद्देश्य और आपसी विश्वास खत्म हो चुका है। ऐसे में केवल कानूनी रूप से विवाह का अस्तित्व बने रहना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर उन्होंने विवाह विच्छेद की मांग की थी और दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले खारिज कर दी थी अपील
इस मामले में इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की अपील खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि फैमिली कोर्ट के आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि दिखाई नहीं देती। अदालत का मानना था कि उमर अब्दुल्ला अपनी पत्नी के खिलाफ लगाए गए क्रूरता के आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के माध्यम से साबित नहीं कर सके। इसलिए हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और तलाक देने से इनकार कर दिया।
फैमिली कोर्ट ने भी नहीं दी थी तलाक की अनुमति
दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने अगस्त 2016 में उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद माना था कि तलाक देने के लिए प्रस्तुत आधार पर्याप्त नहीं हैं। इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने सितंबर 2016 में इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
1994 में हुई थी शादी, दो बेटे हैं
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का विवाह वर्ष 1994 में हुआ था। दोनों का वैवाहिक जीवन कई वर्षों तक सामान्य रूप से चला, लेकिन बाद में संबंधों में मतभेद बढ़ने लगे। दंपति के दो बेटे हैं। पिछले डेढ़ दशक से दोनों अलग रह रहे हैं और अब उन्होंने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह मामला लंबे समय से अदालतों में लंबित था और अब इसके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
सभी मुकदमे वापस लेने पर बनी सहमति
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी कानूनी मामलों और याचिकाओं को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की है। इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद को समाप्त करना है। दोनों पक्षों के बीच हुए इस समझौते को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया, ताकि इसे न्यायिक आदेश का हिस्सा बनाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई कर रही पीठ में शामिल न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि अदालत प्रस्तुत तथ्यों और दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति को अपने आदेश का हिस्सा बनाएगी। उन्होंने बताया कि तलाक संबंधी आवेदन 22 जुलाई को दायर किया गया था और अदालत उसी के अनुरूप आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी। न्यायालय ने संकेत दिया कि आपसी सहमति और सभी लंबित विवादों के समाधान को ध्यान में रखते हुए मामले का निपटारा किया जाएगा।
आपसी सहमति से समाप्त हो सकता है लंबा कानूनी विवाद
सुप्रीम कोर्ट में हुई इस सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पक्ष अब लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त करने के पक्ष में हैं। यदि अदालत अनुच्छेद 142 के तहत राहत प्रदान करती है, तो वर्षों से लंबित यह कानूनी मामला समाप्त हो जाएगा। साथ ही, एक-दूसरे के खिलाफ लंबित मुकदमे भी वापस ले लिए जाएंगे। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी है, जो इस बहुचर्चित वैवाहिक विवाद का औपचारिक और कानूनी अंत तय करेगा।
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