Iran Threat to US: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी के बाद अब तेहरान ने भी कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिकी सेना ने उसके ठिकानों पर कोई नया हमला या सैन्य कार्रवाई की, तो उसका जवाब निर्णायक और बेहद कठोर होगा। ईरानी नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया है कि क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगी देशों को भी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इन बयानों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है।

क्षेत्रीय देशों को ईरान का स्पष्ट संदेश
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य पूर्व का कोई भी देश अमेरिका या इजरायल को उसके खिलाफ सैन्य सहयोग देता है या अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति देता है, तो ऐसे देशों के ऊर्जा और तेल प्रतिष्ठान भी संभावित जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। इस बयान को खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चेतावनी से क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

विदेश मंत्री अराघची ने कई देशों से की बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग फोन पर बातचीत की। इन वार्ताओं के दौरान उन्होंने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव तथा ईरान की रणनीति पर चर्चा की। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन बातचीतों का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों को ईरान के रुख से अवगत कराना और संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना था।
पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब को दी चेतावनी
विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से बातचीत में कहा कि यदि ईरान पर किसी प्रकार का हमला होता है तो उसका पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा। वहीं सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका या इजरायल को किसी क्षेत्रीय देश से सैन्य सहयोग मिलता है, तो ईरान उसे भी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा मान सकता है। इन बयानों ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
कुवैत में ड्रोन घटना से बढ़ी चिंता
इसी बीच कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसने शनिवार को कई संदिग्ध दुश्मन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार ये ड्रोन देश के महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद इस दावे ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। क्षेत्रीय देशों ने अपने महत्वपूर्ण सैन्य और ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाने के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

सऊदी अरब और अमेरिका के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत
तनावपूर्ण हालात के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बातचीत की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस बातचीत में मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति और संभावित सैन्य घटनाक्रम पर चर्चा हुई। बताया गया कि सऊदी नेतृत्व ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और भविष्य की रणनीति को लेकर अमेरिका से स्पष्ट जानकारी मांगी। हालांकि, दोनों देशों की ओर से बातचीत के सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तथा तेल और ऊर्जा प्रतिष्ठान किसी सैन्य संघर्ष की चपेट में आते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां किसी भी बड़े संघर्ष से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसका असर ईंधन, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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