CEO Controversy : जनपद पंचायत अंबिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) राजेश सिंह सेंगर को तत्काल भारमुक्त करने की मांग को लेकर जिला सरपंच संघ ने मोर्चा खोल दिया है। जिलेभर के सरपंच सोमवार को एकजुट होकर अंबिकापुर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर अजीत बसंत को ज्ञापन सौंपकर CEO के खिलाफ निष्पक्ष जांच तथा स्थानांतरण आदेश का पालन कराने की मांग की। सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिवस के भीतर CEO को अंबिकापुर जनपद पंचायत से भारमुक्त नहीं किया गया तो संघ द्वारा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

स्थानांतरण के बाद भी नहीं किया गया भारमुक्त
सरपंच संघ का आरोप है कि जनपद पंचायत अंबिकापुर के CEO राजेश सिंह सेंगर का 30 जून 2026 को रामानुजनगर जनपद पंचायत में स्थानांतरण हो चुका है। इसके बावजूद उन्हें अब तक अंबिकापुर जनपद पंचायत से भारमुक्त नहीं किया गया है। सरपंचों ने कलेक्टर से मांग की कि शासन के स्थानांतरण आदेश का तत्काल पालन कराया जाए और उन्हें नई पदस्थापना के लिए भारमुक्त किया जाए।

जनपद CEO की कार्यशैली को लेकर सरपंचों में नाराजगी
ज्ञापन में सरपंचों ने CEO की कार्यशैली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभिन्न ग्राम पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अनावश्यक जांच, प्रशासनिक दबाव और कथित अवैध मांगों का सामना करना पड़ा है। सरपंच संघ ने इन शिकायतों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सरपंचों का कहना है कि पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ किसी भी तरह का प्रशासनिक दबाव या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
सरईटिकरा सरपंच की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
विवाद की एक प्रमुख वजह जनपद पंचायत अंबिकापुर की ग्राम पंचायत सरईटिकरा के सरपंच के खिलाफ की गई कार्रवाई भी बताई जा रही है। सरपंचों के अनुसार सरईटिकरा सरपंच को गबन के आरोप में गिरफ्तार कर एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने की कार्रवाई से जिलेभर के सरपंचों में नाराजगी फैल गई।

सरपंच संघ का आरोप है कि इस मामले में कार्रवाई की अनुशंसा को लेकर भी सवाल उठे हैं। संघ का कहना है कि सरईटिकरा सरपंच के विरुद्ध अकारण कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने के संबंध में जनपद CEO को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। ऐसे में अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
चीताबहार में सामुदायिक शौचालय की राशि का मामला
सरपंच संघ ने ग्राम पंचायत चीताबहार में सामुदायिक शौचालय के लिए जारी राशि के कथित गबन का मामला भी उठाया है। संघ का आरोप है कि पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। सरपंचों ने मांग की है कि सभी संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
रामसाय मिंज पर कार्रवाई की भी जांच की मांग
ज्ञापन में जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष रामसाय मिंज के विरुद्ध हुई कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया। सरपंचों ने इस कार्रवाई की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में किसी भी कार्रवाई से पहले तथ्यों और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
मामले को लेकर सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने सरपंचों का ज्ञापन प्राप्त होने की पुष्टि की है। कलेक्टर ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पूरे मामले की नियमानुसार जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सात दिन का अल्टीमेटम
सरपंच संघ ने प्रशासन को सात दिवस का समय दिया है। संघ की मांग है कि इस अवधि में जनपद पंचायत अंबिकापुर के CEO राजेश सिंह सेंगर को स्थानांतरण आदेश के अनुसार तत्काल भारमुक्त किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और विभिन्न पंचायतों से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सरपंच संघ ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में जिलेभर के सरपंच धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
फिलहाल कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत स्तर से जांच शुरू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और उसके आधार पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।











